25 दिसंबर 2025 को ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षाबलों ने 1 करोड़ के इनामी और सीपीआई (माओवादी) सेंट्रल कमेटी सदस्य गणेश उइके को एनकाउंटर में मार गिराया. हिड़मा के बाद यह नक्सल नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है.
कंधमाल – भारत को नक्सल मुक्त करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की गई है. इसी लक्ष्य को लेकर सुरक्षाबल नक्सलियों के खिलाफ लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं. जो नक्सली सरेंडर कर रहे हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाया जा रहा है और जो हथियार नहीं डाल रहे, उनका एनकाउंटर किया जा रहा है. टॉप नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के बाद अब 25 दिसंबर 2025 को उस माओवादी को भी मार गिराया गया है, जिसे हिड़मा से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता था. एनकाउंटर में मारा गया यह नक्सली था-गणेश उइके.
69 साल की उम्र में भी लाल आतंक का चेहरा
गणेश उइके 69 साल की उम्र में भी ‘लाल आतंक’ का झंडा उठाए हुए था. हाथ में AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार लेकर चलने वाला यह नक्सली बेहद खतरनाक माना जाता था. शायद यही वजह थी कि उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था.
गणेश उइके कहां का रहने वाला था?
एनकाउंटर में मारा गया नक्सली गणेश उइके तेलंगाना के नलगोंडा जिले के चेंदूर मंडल के पुल्लेमाला गांव का रहने वाला था. वह कुल 7 नामों से जाना जाता था. गणेश उइके के अलावा पक्का हनुमंत, रूपा, राजेश तिवारी, चमरू दादा, गजराला रवि और सोमरू भी उसके नाम थे.






