Home देश राहुल-तेजस्वी की वोटर अधिकार यात्रा में प्रियंका गांधी की एंट्री, बिहार के...

राहुल-तेजस्वी की वोटर अधिकार यात्रा में प्रियंका गांधी की एंट्री, बिहार के सुपौल में उमड़ा सैलाब

32
0
सुपौल में भारत जोड़ो यात्रा के बीच राहुल प्रियंका दोनों ही खुली जीप पर सवार होकर जनता का अभिवादन करते नजर आए। जबकि उनके साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ देखी गई। कार्यकर्ताओं के हाथों में कांग्रेस के झंडे और बैनर लहरा रहे थे।

पटना: वोटर अधिकार यात्रा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को बिहार की धरती पर उतारना कांग्रेस के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है। महागठबंधन के रणनीतिकार और कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता यूं ही नहीं प्रियंका गांधी को बिहार की चुनावी सरजमी पर उतारने की सफल कोशिश कर रहे हैं। ये एक सोची समझी रणनीति है जिसका मकसद राज्य की आधी आबादी पर फोकस्ड है। प्रियंका गांधी का जब राजनीति में प्रवेश हुआ तो उनकी बोलने की शैली, जनता के प्रति आकर्षण का भाव, हाथ हिलाना और जनता के साथ ताली बजा कर उनका उत्साहवर्धन करने जैसी भंगिमा के बाद उनमें न केवल कांग्रेस कार्यकर्ता बल्कि जनता के बीच उनमें आयरन लेडी स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी की झलक देखने लगी।

महागठबंधन को आशा

महागठबंधन के रणनीतिकार प्रियंका गांधी की उसी छवि को परोस कर आधी आबादी के बीच अपनी पैठ बनाना चाहती है। सुपौल की यात्रा में प्रियंका गांधी के प्रति जनता का रिस्पांस और जनता के प्रति प्रियंका का रिस्पांस से इसे समझा जा सकता है। पुनौरा धाम का अपना धार्मिक महत्व हो सकता है पर चुनाव के ऐन मौके पर मिथिलांचल की यात्रा में शामिल करना और पुनौरा धाम में पूजा अर्चना का कार्यक्रम रखने के पीछे भी कही न कही धार्मिक महिलाओं के प्रति कांग्रेस को स्थापित करने का मकसद भी रहा हो। यह अलग बात है कि प्रियंका गांधी का कितना प्रभाव पड़ेगा, पर उनकी यह यात्रा प्रभावहीन तो नहीं होने जा रही है।

जमीनी कार्यकर्ता में उत्साह

गौर करें तो इधर कांग्रेस के राजनीतिक स्वभाव में दब्बूपन से मुक्ति का संघर्ष दिख रहा है है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बदले तेवर का तभी पता चल गया जब राहुल गांधी ने पत्रकारों के लगातार पूछे जाने पर भी यह नहीं कहा कि अगला सीएम तेजस्वी यादव होंगे। वहीं राहुल गांधी के आक्रामक राजनीति के तहत वोटर अधिकार यात्रा और वोट चोर के नारों ने कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं को इस छटपटाहट से मुक्ति दिल दी कि कांग्रेस की भूमिका पिछलग्गू पार्टी सी नहीं रही। राहुल गांधी को बिहार की जनता ने ड्राइविंग सीट पर देखा। इस बार प्रियंका गांधी को वोटर अधिकार यात्रा में उतारकर कांग्रेस की जमीनी कार्यकर्ता के विश्वास को और भी पक्का कर गया।

सवाल भी कम नहीं?

आधी आबादी को साधने आई प्रियंका गांधी के प्रयास को राज्य की मौजूदा कुछ हालात से गुजरना होगा। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक चिंतन में आधी आबादी के लिए खास जगह रही है। ऐसे कई प्रयोग किए हैं जो आधी आबादी की जिंदगी को उड़ान की डोर थमा गए। मसलन…निकाय चुनाव में मिला आधी आबादी को 50 प्रतिशत आरक्षण। नगर निकाय के चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण। पुलिस बहाली में 35 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण। सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण। मैट्रिक,इंटर पास करने वाली छात्रों को क्रमशः 10 और 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि। बालिका साइकिल योजना। बालिका पोशाक योजना। अपरोक्ष रूप से शराबबंदी से महिलाओं को राहत।

महागठबंधन के लिए आसान नहीं

इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रियंका गांधी की यह यात्रा बेअसर नहीं होगी। पर प्रियंका गांधी के इस प्रयास पर जंगल राज की छाया का भी प्रभाव होगा। कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ रही होती तो जनता कांग्रेस के अतीत के साथ जुड़ सकती थी या सत्ता में बदलाव की उम्मीद कर सकती थी। लेकिन अपहरण, फिरौती और नरसंहार के चेहरे को बदलने की चुनौती के विरुद्ध प्रियंका की इस यात्रा के प्रभाव का आकलन वर्ष 2025 विधानसभा चुनाव में भाग लेने वाले मतदाता ही करेंगे।