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कर्नाटकन सीएम – लिंगायत न वोक्कालिगा… कर्नाटक के नाटक में बाजी मार ले गया कुरुबा ‘सरदार’!

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कर्नाटक में सीएम पद को लेकर कांग्रेस की कशमकश के बीच सिद्धारमैया का नाम करीब करीब तय हो गया है। वहीं डीके शिवकुमार को डेप्युटी सीएम के साथ ही अहम मंत्रालयों की कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि सबसे कम वोट बैंक कुरुबा समुदाय से आने वाले सिद्धारमैया का सीएम बनाया जाना अपने आपमें बड़ी बात होगी।

सिद्धारमैया ही बनेंगे मुख्यमंत्री? कल लेंगे शपथ, डीके शिवकुमार को डिप्टी CM पद मिलने की संभावना

बेंगलुरु – कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत के बाद सभी की निगाहें सीएम पद पर नाम के फैसले पर लगी है। 10 मई को हुए कर्नाटक चुनाव का जनादेश तो 13 मई को ही आ गया था। लेकिन सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को लेकर पेंच ऐसा फंसा कि कांग्रेस के लिए फैसला लेना आसान नहीं था। सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक करीब-करीब यह तय हो गया है कि कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ही होंगे। वहीं संकटमोचक कहे जाने वाले शिवकुमार को डेप्युटी सीएम के साथ ही बड़े मंत्रालय दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। कर्नाटक के चुनावी माहौल में खासा चर्चा का विषय रहने वाले लिंगायत और वोक्कालिगा से इतर कुरुबा समुदाय के सिद्धारमैया सीएम पद पर बाजी मारने में कामयाब रहे।

क्यों खास है ‘कुरुबा’ चेहरे का CM बनना?

कर्नाटक की राजनीति आम तौर पर समुदाय विशेष के इधर-उधर घूमती है यह बात किसी से छिपी नहीं है। राज्य में चुनाव के दौरान भी यह माहौल बखूबी देखने को मिला था। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के तौर पर सबसे ज्यादा खास माना जाता रहा है। यही वजह रही कि बीजेपी ने शुरू से इस समुदाय का दामन थामे रखा। जिसको येदियुरप्पा के तौर पर देखा जा सकता है। वोट बैंक की बात करें तो लिंगायत का आबादी प्रतिशत 17 फीसदी यानी कि सबसे ज्यादा है। वहीं इसके बाद वोक्कालिगा 14 फीसदी के साथ दूसरे, मुस्लिम वोट बैंक 12 फीसदी और कुरुबा 9 प्रतिशत वोट बैंक के साथ क्रमश: तीसरे और चौथे नंबर पर काबिज है।

सिद्धारमैया Vs डीके शिवकुमार, पेंच में क्यों फंसी कांग्रेस

बंपर जीत के बाद भी कांग्रेस कर्नाटक के नाटक में फंसी नजर आई। ऐसा इसलिए क्योंकि सिद्धारमैया हों या फिर डीके शिवकुमार दोनों का ही कद पार्टी किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं कर सकती। पार्टी के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर राहुल गांधी के लिहाज से पहली पसंद जहां सिद्धा हैं तो वहीं पारिवारिक तौर पर डीके ने भी सोनिया और प्रियंका से अपनी वफादारी की छाप छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चुनाव के बीच डीके शिवकुमार लगातार इस बात को कहते रहे कि कांग्रेस कर्नाटक में करीब 140 सीटें जीतेगी। जिसके बाद कहीं न कहीं रिजल्ट में भी कमोवेश वैसा ही नजारा देखने को मिला। जहां कांग्रेस ने 135 सीटें हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।