पहाड़ी गांव में चौपाल लगाकर सुनी समस्याएं, तत्काल 4 कुएं खोदने की मंजूरी दी
गरियाबंद – नक्सल प्रभावित रहे मैनपुर विकासखंड के दुर्गम पहाड़ी गांव ताराझर और कुरवापानी में आजादी के बाद पहली बार कोई जिला स्तरीय अधिकारी पहुंचा। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने ओडिशा के रास्ते 60-65 किमी और फिर 2-3 किमी पैदल पगडंडी तय कर इन गांवों का औचक निरीक्षण किया। अफसर को अपने बीच पाकर कमार जनजाति के ग्रामीण भावुक हो उठे।
नक्सल मुक्त क्षेत्र में जगी विकास की उम्मीद
कुल्हाड़ीघाट पंचायत के ये गांव कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाते थे। एक साल पहले यहां नक्सली कमांडर जयराम चलपति सहित कई हार्डकोर नक्सली मारे गए थे। 31 मार्च को इस क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसके बाद पहली बार प्रशासनिक अमला ग्रामीणों की समस्या सुनने पहुंचा।
पैदल पहुंचकर जानी जमीनी हकीकत
CEO प्रखर चंद्राकर ने ओडिशा रास्ते से नदी-नालों और पथरीली पगडंडी पार कर गांव तक पहुंचकर प्रधानमंत्री आवास, आंगनबाड़ी और स्कूल भवन निर्माण का निरीक्षण किया। वे खुद कमार जनजाति के घरों तक गए और योजनाओं की जमीनी हकीकत पर
पेयजल सबसे बड़ी समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि गांव से दूर सूखी नदी में झरिया खोदकर पानी लाना पड़ता है। जंगली जानवरों के डर से अकेले जाना संभव नहीं। समस्या सुनकर CEO ने मौके पर झरिया देखा और गांव में तत्काल 4 सरकारी कुएं खोदने की मंजूरी दी। उन्होंने चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और स्कूली बच्चों को किताब, कॉपी, पेन, गणवेश, जूता, बैग भी वितरित किए।
सड़क, स्वास्थ्य और राशन को लेकर मांग
सरपंच बनसिंग सोरी और ग्रामीणों ने मांग की कि बोतलधारा मार्ग से पत्थरों को काटकर जी-राम-जी योजना के तहत सड़क बनाई जाए। गर्भवती और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से मौतें हो जाती हैं। राशन लेने के लिए 35-40 किमी कुल्हाड़ीघाट या ओडिशा जाना पड़ता है। इसके लिए ग्रामीण घोड़े में लादकर चावल-दाल लाते हैं।ग्रामीणों ने बताया कि सौर ऊर्जा की प्लेटें 5-6 साल से खराब हैं, मरम्मत नहीं हुई। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली की मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की मांग की।
निर्माण कार्य में दिक्कत
ताराझर में रेत न मिलने से स्कूल भवन निर्माण की लागत दोगुनी हो गई है। ओडिशा से रेत पहाड़ी तक लाई जाती है। पहाड़ी तक बनी कच्ची सड़क पहली बारिश में ही बह गई।
CEO ने दिया आश्वासन
जिला पंचायत CEO प्रखर चंद्राकर ने कहा कि शासन-प्रशासन दूरस्थ वनांचल के गांवों तक सुविधा पहुंचाने के लिए प्रयासरत है।
इस दौरान जनपद पंचायत मैनपुर CEO जे.के. गजभिये, मनरेगा परियोजना अधिकारी कपिल नायक, BMO डॉ. गजेन्द्र ध्रुव, सचिव प्रेम ध्रुव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।






