सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने उनके पॉडकास्ट में दिए बयानों […]
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने उनके पॉडकास्ट में दिए बयानों को अदालत की अवमानना करार दिया, लेकिन ‘दरियादिली’ दिखाते हुए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
मेनका गांधी के बयान पर कोर्ट भड़का
मेनका गांधी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने पहले कहा था कि आवारा कुत्तों के हमलों में अगर बच्चे या बुजुर्ग घायल या मारे जाते हैं, तो राज्य सरकारों से भारी मुआवजा वसूला जाएगा। साथ ही, कुत्तों को खाना खिलाने वालों (डॉग फीडर्स) की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। कोर्ट ने पूछा था कि अगर लोग कुत्तों से इतना प्यार करते हैं तो उन्हें अपने घर क्यों नहीं रखते? मेनका गांधी ने इन टिप्पणियों को गलत ठहराया और कोर्ट की आलोचना की।






