मुंबई – ठाकरे परिवार को गढ़ को भेदते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का गठबंधन शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में कामयाब रहा। सत्तारूढ़ गठबंधन ने कुल 227 सीटों में से 118 सीट पर जीत दर्ज की।
शिवसेना (उद्धव गुट)-मनसे-एनसीपी (शरदचंत्र पवार) गठबंधन ने कुल 72 सीटों पर जीत हासिल की। विभाजित होने से पहले शिवसेना ने 1997 से 25 साल तक इस नगर निगम पर शासन किया। उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को कुल 65 सीटें मिलीं। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने छह सीटें हासिल कीं, जबकि शरद पवार गुट की एनसीपी को केवल एक सीट मिली। अन्य दलों में कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को आठ, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को तीन और समाजवादी पार्टी को दो सीटों पर जीत मिलीं। इन चुनावों में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की। यह चुनाव नौ साल के अंतराल के बाद हुए।
पिछले बीएमसी चुनाव के नतीजे कैसे थे?
2017 के बीएमसी चुनाव शिवसेना (अविभाजित) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और उसे 84 सीटें मिलीं। वहीं, भाजपा को 82 सीट पर जीत मिली थी, कांग्रेस को 21, एनसीपी को नौ, मनसे को सात, समाजवादी पार्टी को छह, एआईएमआईएम को दो, अखिल भारतीय सेना को एक और एक और अन्य को पांच सीटें मिली थीं। उस समय भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।
मतगणना में देरी क्यों हुई?
इस बार विभिन्न कारणों से मतगणना देरी से शुरू हुई। इसमें दोषपूर्ण ईवीएम, फिर से मतगणना की मांग और पहले चरण में मतगणना जैसी नई प्रक्रिया शामिल थी। मतगणना सुबह 10 बजे से शुरू की। नगर निगम आयुक्त और जिला चुनाव अधिकारी भूषण गागरानी ने बताया, मुंबई के घाटकोपर इलाके के एक वार्ड में मतगणना के समय ईवीएम की कंट्रोल यूनिट की नकली यूनिट का इस्तेमाल किया गया, जिसे प्रिंटिंग ऑक्सीलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) कहा जाता है।






