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ब्रह्मांड में महाप्रलय के बाद वैज्ञानिकों ने सुनी मौत की आखिरी आह! आइंस्टीन का 100 साल पुराना दावा सच निकला

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नई दिल्ली: ब्रह्मांड की गहराइयों में जब दो महाविशाल ब्लैक होल आपस में टकराते हैं, तो वहां ऐसी तबाही मचती है जिसकी हम कल्पना ही कर सकते हैं. इस टक्कर से निकलने वाली तरंगें पूरे अंतरिक्ष में कंपन पैदा करती हैं. इसे हम ग्रेविटेशनल वेव्स के नाम से जानते हैं. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसा खोजा है जिसने सबको चौंका दिया है. उन्होंने इन तरंगों के पीछे छिपी एक बहुत ही धीमी आवाज पकड़ी है. इसे ‘लेट-टाइम ग्रेविटेशनल वेव टेल्स’ कहा जा रहा है. यह खोज इसलिए खास है क्योंकि अभी तक यह सिर्फ थ्योरी थी. पहली बार वैज्ञानिकों ने इसे अपनी आंखों से सिमुलेशन में देखा है. यह गूंज बताती है कि महाप्रलय के बाद स्पेस-टाइम कैसे वापस अपनी जगह पर आता है. यह रिसर्च फिजिकल रिव्यू लेटर्स में छपी है. इसमें 20 बड़े वैज्ञानिकों की टीम ने काम किया है. यह खोज आइंस्टीन के दावों पर भी मुहर लगाती ह
ब्लैक होल की टक्कर से स्पेस में गूंजी घंटी का क्या है राज?
जब दो ब्लैक होल टकराते हैं तो वे घंटी की तरह बजते हैं. इससे निकलने वाली लहरें बहुत तेज होती हैं. वे पूरे स्पेस-
टाइम को खींचती और सिकोड़ती हैं. लेकिन घंटी बजने के बाद जैसे धीमी गूंज बचती है. वैसे ही ब्रह्मांड में भी एक धीमी गूंज रह जाती है. इसे वैज्ञानिक ‘पूंछ’ या टेल कह रहे हैं.
यह आवाज बहुत ही सुरीली और धीमी होती है. इसे पकड़ना बहुत मुश्किल काम था. क्योंकि यह असली लहरों के मुकाबले बहुत कमजोर होती है. पर वैज्ञानिकों ने इसे सिमुलेशन में साफ देखा है.
क्या इस गूंज से खुलेगा ब्रह्मांड की बनावट का कोई बड़ा रहस्य?
ग्रेविटेशनल वेव्स अपने साथ बहुत सारा डेटा लाती हैं. इससे हमें ब्लैक होल के बारे में पता चलता है. लेकिन यह नई गूंज कुछ और भी बताती है. यह गूंज उस पूरे रास्ते की जानकारी देती है. जहां से ये लहरें होकर गुजरी हैं. यह ब्रह्मांड के बड़े ढांचे का पता देती है.
वैज्ञानिक मरीना डी एमिसिस ने इस पर काम किया है. उन्होंने कहा कि यह पूंछ बहुत दिलचस्प चीज है. यह किसी एक फ्रीक्वेंसी पर नहीं बजती. बल्कि यह कई आवाजों का एक मिला-जुला मिश्रण है. यह स्पेस-टाइम के रिलैक्स होने का फाइनल विम्पर है. इससे हमें बिग पिक्चर देखने में मदद मिलेगी.
वैज्ञानिकों ने इस ‘लाउड’ टक्कर को कैसे मुमकिन बनाया?
  • इस धीमी आवाज को सुनना बहुत कठिन था. इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक खास तरीका अपनाया. उन्होंने कंप्यूटर पर ब्लैक होल की टक्कर कराई. उन्होंने इस टक्कर को जानबूझकर बहुत तेज बनाया.
  • आमतौर पर ब्लैक होल घूमते हुए टकराते हैं. लेकिन सिमुलेशन में उन्हें सीधा टकराया गया. जैसे दो गाड़ियां आमने-सामने से टकराती हैं. इससे जो धमाका हुआ वह बहुत लाउड था.
  • इसी शोर के बीच वह धीमी गूंज सुनाई दी. लियो स्टेन ने कहा कि हमने इसे पहली बार देखा है. यह न्यूमेरिकल रिलेटिविटी की एक बड़ी जीत है. इससे हमें भविष्य की रिसर्च के लिए रास्ता मिला है.
क्या नेचर में ब्लैक होल कभी सीधे टकरा सकते हैं?
सिमुलेशन में सीधा टकराना आसान काम है. लेकिन क्या असली अंतरिक्ष में ऐसा होता है? लियो स्टेन का मानना है कि ऐसा होना मुश्किल है. ब्लैक होल अक्सर एक-दूसरे के चक्कर काटते हैं. वे धीरे-धीरे पास आते हैं और फिर मिलते हैं. सीधी टक्कर की संभावना बहुत ही कम होती है. लेकिन वैज्ञानिकों को डेटा के लिए इसकी जरूरत थी. उन्होंने मशीनों को इस तरह तैयार किया है. अब वे कम शोर में भी इसे खोज सकेंगे. नेचर हमें शायद सीधी टक्कर न दे. लेकिन हम अब धीमी गूंज को पहचानना जानते हैं.
सिमुलेशन में सीधा टकराना आसान काम है. लेकिन क्या असली अंतरिक्ष में ऐसा होता है? लियो स्टेन का मानना है कि ऐसा होना मुश्किल है. ब्लैक होल अक्सर एक-दूसरे के चक्कर काटते हैं. वे धीरे-धीरे पास आते हैं और फिर मिलते हैं. सीधी टक्कर की संभावना बहुत ही कम होती है. लेकिन वैज्ञानिकों को डेटा के लिए इसकी जरूरत थी. उन्होंने मशीनों को इस तरह तैयार किया है. अब वे कम शोर में भी इसे खोज सकेंगे. नेचर हमें शायद सीधी टक्कर न दे. लेकिन हम अब धीमी गूंज को पहचानना जानते हैं.
आइंस्टीन की थ्योरी इस खोज से कैसे सच साबित हुई?
अल्बर्ट आइंस्टीन ने 100 साल पहले एक बात कही थी. उन्होंने कहा था कि स्पेस-टाइम मुड़ सकता है. यह नई खोज इसी बात का सबसे बड़ा सबूत है. पूंछ या टेल तभी बन सकती है जब स्पेस मुड़ा हो. अगर स्पेस एकदम फ्लैट होता तो यह गूंज नहीं होती. जनरल रिलेटिविटी की थ्योरी ने यह पहले ही बताया था. लेकिन इसे साबित करने में एक सदी लग गई. अब वैज्ञानिक दावे के साथ कह सकते हैं. आइंस्टीन का गणित एकदम सटीक और सही था.
भविष्य में लिसा और लीगो को इस खोज से क्या फायदा होगा?
लीगो और लिसा अंतरिक्ष की लहरों को पकड़ते हैं. वे डेटा के पहाड़ों में डूबे रहते हैं. अब उनके पास एक नया गाइड मौजूद है. उन्हें पता है कि डेटा में क्या ढूंढना है. इस रिसर्च से मिलने वाले मॉडल्स बहुत काम आएंगे. वैज्ञानिक अब असली डेटा में पूंछ की तलाश करेंगे. इससे ब्रह्मांड की उम्र और बनावट का पता चलेगा. मरीना ने कहा कि अगला कदम और बड़ा होगा. अब वे इसमें ब्लैक होल की गति भी जोड़ेंगे. इससे सिमुलेशन और भी रियल हो जाएगा. हम ब्रह्मांड के शुरूआती दिनों के करीब पहुंचेंगे.