सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को चेताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में 50% से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता, वरना चुनाव रोक दिए जाएंगे. बंठिया आयोग की रिपोर्ट अभी विचाराधीन है.
नई दिल्ली – महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले आरक्षण को लेकर बड़ा टकराव खड़ा हो गया है. सुप्रीम कोर्ट भावी सीजेआई जस्टिस सूर्यकांंत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को राज्य सरकार को चेतावनी दी कि स्थानीय निकाय चुनावों में 50% आरक्षण सीमा से अधिक नहीं दिया जा सकता. यदि सरकार ने सीमा का उल्लंघन किया, तो कोर्ट ने साफ कहा, चुनाव पर रोक लगा देंगे, हमारी शक्तियों की परीक्षा मत लीजिए.
महाराष्ट्र में दिसंबर 2025 तक लंबे समय से अटके हुए स्थानीय निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं. लेकिन OBC आरक्षण को लेकर विवाद जारी है. 2022 में जस्टिस जे.के. बंठिया आयोग ने ओबीसी के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की थी, जिससे कुल आरक्षण 50% से ऊपर चला जाता. इसी मुद्दे पर अब फिर कानून और संवैधानिक मर्यादा का सवाल खड़ा हो गया है.
अदालत की सख्त टिप्पणी
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने कहा, अगर दलील यह है कि नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है, इसलिए कोर्ट हस्तक्षेप न करे, तो हम चुनाव ही रोक देंगे. 50% सीमा संवैधानिक है, उसका उल्लंघन नहीं होगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दो-न्यायाधीशों की बेंच संविधान पीठ के फैसले को नहीं बदल सकती, इसलिए 50% से अधिक आरक्षण को किसी भी हाल में मंजूरी नहीं दी जा सकती.
महाराष्ट्र सरकार की दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और राज्य की ओर से दलील दी कि नामांकन की अंतिम तारीख चल रही है और अदालत प्रक्रिया बाधित न करे. कोर्ट ने जवाब दिया, हमने कभी नहीं कहा कि 50% सीमा से ज्यादा आरक्षण हो सकता है. अदालत के आदेशों की गलत व्याख्या मत कीजिए. अगर आप सीमा लांघने पर जोर देंगे तो हम आदेश पास कर देंगे, फिर कोई बहाना नहीं चलेगा.
70% तक पहुंच गया आरक्षण?
सीनियर वकील विकास सिंह और नरेंद्र हुड्डा ने कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र में कई निकायों में आरक्षण 50% से पार कर 70% तक पहुंच चुका है. यह सीधे-सीधे संविधान पीठ के निर्देशों का उल्लंघन है. कोर्ट ने इन दावों पर गंभीर रुख अपनाते हुए नोटिस जारी किया.
बंठिया आयोग पर कोर्ट की स्थिति
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, बंठिया आयोग की रिपोर्ट अभी भी उप-न्यायिक प्रक्रिया में है (sub-judice). हमारा आदेश साफ था, चुनाव वही व्यवस्था के तहत कराए जाएं जो रिपोर्ट से पहले लागू थी. यानी आरक्षण का वही पैटर्न लागू होगा जो 2022 से पहले था और वह 50% की संवैधानिक सीमा के भीतर था.
अदालत की नाराजगी: सरकारी अधिकारी आदेश को जटिल बना रहे
कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा, हमारे सरल आदेश को अधिकारी जटिल बना रहे हैं. अगर ऐसा होता रहा तो नामांकन प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ेगी. एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार कोर्ट के अंतिम आदेश (19 नवंबर को सुनवाई) तक कोई कदम नहीं उठाएगी जो नियमों के विपरीत हो.
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का इतिहास
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की 27% OBC आरक्षण वाली अधिसूचना रद्द की. अदालत ने कहा, तब तक आरक्षण नहीं दिया जा सकता जब तक सरकार ट्रिपल टेस्ट पूरा न करे. आयोग ने भी साफ कहा है कि आरक्षण 50% से अधिक न हो. राज्य सरकार ने अध्यादेश लाकर 27% आरक्षण देने की कोशिश की, लेकिन मामला फिर कोर्ट में गया. लेकिन 50 फीसदी वाला मामला अटका रहा.






