नई दिल्ली – दिल्ली के लाल किला में हुए भीषण विस्फोट मामले की जाँच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में, पंजाब के पठानकोट स्थित मामून कैंट के एक मेडिकल कॉलेज से सीनियर सर्जन डॉ रईस अहमद भट्ट को एक अज्ञात एजेंसी ने हिरासत में लिया है। डॉ भट्ट पर दिल्ली विस्फोट के मुख्य आरोपित आतंकी डॉ उमर के संपर्क में होने का गंभीर संदेह है। वर्तमान में, जाँच एजेंसियाँ इस संदिग्ध लिंक की पड़ताल के लिए उनसे पूछताछ कर रही हैं।
कौन हैं डॉ रईस अहमद भट्ट?
डॉ रईस अहमद भट्ट पिछले तीन सालों से मामून कैंट स्थित व्हाइट मेडिकल कॉलेज में सर्जन के रूप में काम कर रहा था। अस्पताल के प्रबंधक स्वर्ण सलारिया ने बताया कि देर रात एजेंसी के अधिकारी उन्हें अचानक अपने साथ ले गए। डॉ भट्ट मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के रहने वाले हैं।
संदिग्ध लिंक और अल-फलाह कनेक्शन
जाँच में सामने आया है कि डॉ रईस भट्ट पहले चार साल तक फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में भी काम कर चुके हैं। यह वही यूनिवर्सिटी है जहाँ हाल ही में सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जाँच के दौरान कई संदिग्ध नाम सामने आए थे। माना जा रहा है कि डॉ भट्ट अभी भी वहाँ तैनात कुछ कर्मचारियों के संपर्क में थे। सबसे अहम कड़ी यह है कि डॉ भट्ट दिल्ली विस्फोट के मुख्य आरोपित डॉ उमर के संपर्क में था, जिसकी वजह से उसे हिरासत में लिया गया है।
यूनिवर्सिटी स्टाफ पर भी शिकंजा
जाँच एजेंसियाँ अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी के वर्तमान और पूर्व स्टाफ की भी जाँच तेज कर रही हैं। टीम ने परिसर पहुँचकर उन सभी कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी जुटाई है जो पहले यहाँ काम करते थे।
उनके नाम, पद और नौकरी छोड़ने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि इस मामले में इससे पहले भी चार अन्य डॉक्टर (मुजफ्फर अहमद, आदिल अहमद राथर, मुजम्मिल शकील और शाहीना सईद) को आतंकी लिंक के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।






