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ट्रंप ने भारत से बिगाड़े रिश्ते, PAK के साथ की बिजनेस डील… अमेरिकी राष्ट्रपति पर बरसे पूर्व NSA जेक सुलिवन

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Jake Sullivan on Trump : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि ट्रंप ने अपने परिवार के कारोबारी हितों के चलते भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को बलि चढ़ाया और पाकिस्तान को तरजीह दी. सुलिवन के अनुसार, यह ट्रंप की विदेश नीति का सबसे कम रिपोर्ट किया गया पहलू है, जिसने भारत-अमेरिका साझेदारी को गहरा नुकसान पहुँचाया.

दोनों पार्टियों ने मिलकर संबंध मजबूत किया 

सुलिवन ने कहा कि लंबे समय से रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों ने मिलकर भारत के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में काम किया. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और तकनीक, अर्थव्यवस्था, प्रतिभा और चीन को रणनीतिक चुनौती देने के मोर्चे पर अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार होना चाहिए. लेकिन ट्रंप के फैसलों ने इस रिश्ते को पीछे धकेल दिया.

पाकिस्तान के साथ कारोबारी डील और ट्रंप परिवार

सुलिवन ने खुलासा किया कि पाकिस्तान ने ट्रंप परिवार के साथ बिजनेस डील करके भारत को दरकिनार करने का माहौल बनाया. ट्रंप के परिवार से जुड़ी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) ने पाकिस्तान की नई क्रिप्टो काउंसिल (PCC) के साथ करार किया. यह सौदा पहलगाम हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ, जिससे साफ झलकता है कि ट्रंप प्रशासन इस्लामाबाद की ओर झुकाव रखता था. WLF में ट्रंप के बेटे एरिक, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और दामाद जैरेड कुश्नर की हिस्सेदारी बताई गई है.

भारत पर ऊँचे टैरिफ, पाकिस्तान को छूट

सुलिवन ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया, जबकि पाकिस्तान पर मात्र 19% टैक्स लगाया गया. अमेरिका ने इसे व्यापार घाटे और रूस से तेल खरीदने का कारण बताया, लेकिन असल वजह यह थी कि भारत ने ट्रंप के झूठे मध्यस्थता दावे को उजागर किया था. इससे अमेरिकी राष्ट्रपति भारत से नाराज हो गए और पाकिस्तान को प्राथमिकता देने लगे.

वैश्विक प्रभाव और अमेरिकी छवि पर असर

सुलिवन का कहना है कि अगर अमेरिका अपने सहयोगियों जैसे भारत के साथ भरोसेमंद रिश्ता नहीं निभा सकता, तो जर्मनी, जापान या कनाडा जैसे देश भी भविष्य में असुरक्षित महसूस करेंगे. इसका नतीजा यह होगा कि देश अमेरिका से दूरी बनाकर खुद को सुरक्षित रखने की नीति अपनाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि आज की तारीख में कई देशों में चीन की लोकप्रियता अमेरिका से आगे निकल चुकी है, जबकि अमेरिका की ब्रांड छवि “गिरावट” में है.

भारत-चीन-रूस समीकरण और अमेरिकी चिंता

सुलिवन के बयान ऐसे समय आए हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच रिश्ते गर्मजोशी भरे दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस पृष्ठभूमि में भारत के साथ संबंधों का कमजोर होना अमेरिका के लिए रणनीतिक झटका साबित हो सकता है.