Home देश कमीशन चाहिए तो बताओ, मजाक मत बनाओ… 2 मिनट में IAS अफसर...

कमीशन चाहिए तो बताओ, मजाक मत बनाओ… 2 मिनट में IAS अफसर की निकाल दी हेकड़ी

56
0
झारखंड हाई कोर्ट ने जमीन मुआवजा मामले में IAS मनोज कुमार पांडेय को फटकार लगाई, प्रक्रिया में बाधा डालने और कमीशन की बात पर FIR की चेतावनी दी. अधिकारी ने माफी मांगी.
रांची – झारखंड हाई कोर्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. इसमें जज जमीन अधिग्रहण के मामले की सुनवाई कर रहे हैं. लेकिन इस दौरान उन्होंने सीनियर IAS अधिकारी मनोज कुमार पांडेय को जमकर फटकार लगाई. मामला जमीन मुआवजे से जुड़ा है. राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का फैसला किया था. लेकिन IAS अफसर ने उस पर आपत्ति जता दी. कोर्ट ने यह गंभीर माना और साफ कहा- “आप कौन होते हैं मुआवजे पर सवाल उठाने वाले? यह आपका क्षेत्राधिकार नहीं है. अगर कमीशन चाहिए तो बताइए कितना कमीशन अब तक लिया है.”

जज यहीं नहीं रुके. उन्होंने सख्त लहजे में पूछा- “पूरे हिंदुस्तान में एक कानून चलता है, या झारखंड में अलग? यह जनता का पैसा है, इसे ऐसे बर्बाद नहीं किया जा सकता. मजाक बनाकर रख दिया है प्रक्रिया का. FIR करनी पड़ी तो करेंगे.”
आप होते कौन हैं…?
कोर्ट में जब जज ने अफसर से नाम और पद पूछा तो उन्होंने जवाब दिया- “मनोज कुमार, प्रोजेक्ट डायरेक्टर.” इस पर जज ने फिर सवाल दागे. राज्य की संपत्ति पर आपत्ति जताने वाले आप होते कौन हैं? किस नियम के तहत आपने मुआवजा रोकने की कोशिश की? अफसर की ओर से वकील ने दलील दी कि जिला मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है. लेकिन जज ने तुरंत कहा- “राज्य ने जिसे ‘रैयत’ माना है, आप कौन होते हैं कहने वाले कि वह रैयत नहीं है? आप तो इस मामले के पक्षकार भी नहीं हैं. सिर्फ कमीशन के लिए आप प्रक्रिया में अड़ंगे डाल रहे हैं.”
एक हफ्ते में सुधारो वरना FIR
आखिर में जज ने साफ चेतावनी दी “या तो पूरा मामला सही तरीके से कंपाइल कीजिए, नहीं तो FIR दर्ज होगी. सिर्फ एक हफ्ते का वक्त दे रहे हैं. परमीशन का बहाना मत बनाइए. जो आपके अधिकार क्षेत्र में है, वही कीजिए. भाई-भाई के बंटवारे में बंदर की तरह कूदने की जरूरत नहीं है. अधिकारी ने झट से कहा-“सॉरी सर.”
लेकिन जज का गुस्सा कम नहीं हुआ.