बिहार के किशनगंज में गजब हो गया. एक महिला ने वोटर लिस्ट ड्राफ्ट में अपना नाम देखा. वह लिस्ट देख बौखला गई और सीधे बीडीओ साहब के दफ्तर जा पहुंची.
किशनगंज – ज़रा सोचिए, आप बिल्कुल स्वस्थ और जिंदा हैं, रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे हैं और अचानक सरकारी सूची में आपका नाम ‘मृतक’ के कॉलम में दर्ज हो जाए. ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड के छतरगाछ पंचायत से. यहां साजेदा बेगम नामक महिला ने जब मतदाता सूची देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.
मतदाता सूची (SIR) के प्रारूप प्रकाशन में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था. जबकि हकीकत ये है कि साजेदा बेगम आज भी अपने गांव छतरगाछ रहमतपुर वार्ड संख्या 06 में जिंदा और पूरी तरह स्वस्थ हैं.
दनदनाती पहुंचीं BDO ऑफिस
सूची में खुद को मृत देख साजेदा बेगम गुस्से से आग-बबूला हो गईं. वे सीधे पोठिया प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के दफ्तर जा पहुंचीं और वहां अधिकारियों से भिड़ गईं. उन्होंने दस्तावेज़ और अपनी वोटर आईडी लहराते हुए सवाल दागे – “ये क्या है? मैं जिंदा हूं, सांस ले रही हूं, चल-फिर रही हूं, फिर मुझे मृत कैसे घोषित कर दिया गया?”
सूची में खुद को मृत देख साजेदा बेगम गुस्से से आग-बबूला हो गईं. वे सीधे पोठिया प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के दफ्तर जा पहुंचीं और वहां अधिकारियों से भिड़ गईं. उन्होंने दस्तावेज़ और अपनी वोटर आईडी लहराते हुए सवाल दागे – “ये क्या है? मैं जिंदा हूं, सांस ले रही हूं, चल-फिर रही हूं, फिर मुझे मृत कैसे घोषित कर दिया गया?”
सिस्टम की लापरवाही का नतीजा
दरअसल, यह मामला भाग संख्या 157 उत्क्रमित मध्य विद्यालय कन्या छतरगाछ बूथ से जुड़ा है. यहां साजेदा बेगम का नाम पहले से दर्ज था, लेकिन पुनरीक्षण के दौरान विलोपित नामों की सूची में क्रम संख्या 02 पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. “मेरे पास 2003 से वोटर आईडी है. हर चुनाव में मतदान करती रही हूं. फिर भी मुझे मृत मानकर सूची से बाहर कर दिया गया. ये लापरवाही नहीं, बल्कि मज़ाक है.”
दरअसल, यह मामला भाग संख्या 157 उत्क्रमित मध्य विद्यालय कन्या छतरगाछ बूथ से जुड़ा है. यहां साजेदा बेगम का नाम पहले से दर्ज था, लेकिन पुनरीक्षण के दौरान विलोपित नामों की सूची में क्रम संख्या 02 पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. “मेरे पास 2003 से वोटर आईडी है. हर चुनाव में मतदान करती रही हूं. फिर भी मुझे मृत मानकर सूची से बाहर कर दिया गया. ये लापरवाही नहीं, बल्कि मज़ाक है.”
सदमे में परिवार, पूरे गांव में चर्चा
जब साजेदा बेगम ने यह जानकारी घरवालों और पड़ोसियों को दी तो हर कोई हैरान रह गया. गांव में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर जीवित व्यक्ति को मृत कैसे मान लिया गया. खुद महिला भी सदमे में हैं और कहती हैं कि अगर इस गलती को ठीक नहीं किया गया तो उनका वोट देने का अधिकार छिन जाएगा.
जब साजेदा बेगम ने यह जानकारी घरवालों और पड़ोसियों को दी तो हर कोई हैरान रह गया. गांव में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर जीवित व्यक्ति को मृत कैसे मान लिया गया. खुद महिला भी सदमे में हैं और कहती हैं कि अगर इस गलती को ठीक नहीं किया गया तो उनका वोट देने का अधिकार छिन जाएगा.
BDO ने क्या कहा?
मामले पर जब पोठिया प्रखंड विकास पदाधिकारी मो. आसिफ से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि कई जगह से ऐसी शिकायतें मिली हैं. उन्होंने कहा- “यह अभी प्रारूप सूची है. इसमें जो भी गलतियां हैं, उन्हें अंतिम प्रकाशन से पहले सुधारा जाएगा. दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चल रही है. साजेदा बेगम का नाम भी दुरुस्त कर लिया जाएगा.” यह पहला मामला नहीं है. मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान (SIR) में इस तरह की गड़बड़ियां लगातार सामने आ रही हैं. उधर, विपक्ष के नेताओं ने एसआईआर में कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए वोटर अधिकार यात्रा निकाली है.
मामले पर जब पोठिया प्रखंड विकास पदाधिकारी मो. आसिफ से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि कई जगह से ऐसी शिकायतें मिली हैं. उन्होंने कहा- “यह अभी प्रारूप सूची है. इसमें जो भी गलतियां हैं, उन्हें अंतिम प्रकाशन से पहले सुधारा जाएगा. दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चल रही है. साजेदा बेगम का नाम भी दुरुस्त कर लिया जाएगा.” यह पहला मामला नहीं है. मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान (SIR) में इस तरह की गड़बड़ियां लगातार सामने आ रही हैं. उधर, विपक्ष के नेताओं ने एसआईआर में कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए वोटर अधिकार यात्रा निकाली है.






