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आवेदक ‘एयरफोन’, पिता का नाम ‘मोबाइल’ और मां ‘बैटरी’, अब मधेपुरा में निवास प्रमाण पत्र का अजब-गजब खेल, जानिये पूरा मामला

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मधेपुरा – बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदाता पुनरीक्षण के दौरान RTPS पोर्टल पर निवास प्रमाण पत्र के लिए हैरान करने वाले आवेदन सामने आ रहे हैं. पटना के मसौढ़ी में ‘डॉग बाबू’ के नाम से प्रमाण पत्र जारी होने के बाद अब मधेपुरा, नवादा, समस्तीपुर और मोतिहारी से भी ऐसे ही आवेदन मिलने के मामले सामने आए हैं. कुत्ते, ट्रैक्टर, फोन और बाइक के नाम से आवेदन ने प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े किए हैं. मधेपुरा के इस मामले ने तो सबको हैरान कर दिया है. वायरल हो रहे आवेदन (संख्या BRCCO/2025/17866751) ने सबको आश्चर्य में डाल दिया है, क्योंकि इसमें आवेदक का नाम ‘एयरफोन’, पिता का नाम ‘मोबाइल’ और मां का नाम ‘बैटरी’ दर्ज है. आवेदन में पिन कोड 852124, थाना घैलाढ़, डाकघर श्रीनगर, ग्राम पंचायत/वार्ड 01, प्रखंड घैलाढ़ और जिला मधेपुरा का जिक्र है. 28 जुलाई 2025 को किए गए इस आवेदन की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं.

पहले भी सामने आए ऐसे मामले
यह पहला मामला नहीं है. पटना के मसौढ़ी में ‘डॉग बाबू’ के नाम से प्रमाण पत्र जारी हुआ, जिसके बाद कार्यपालक सहायक को गिरफ्तार किया गया. नवादा में ‘डॉगेश बाबू’ और मोतिहारी में ‘सोनालिका ट्रैक्टर’ के नाम से आवेदन सामने आए जिसमें भोजपुरी अभिनेत्री मोनालिसा की तस्वीर भी लगाई गई. समस्तीपुर में ‘पैशन प्रो’ नाम से बाइक के लिए आवेदन मिला. ये मामले प्रशासनिक लापरवाही या साइबर मजाक की ओर संकेत तो करते हैं, लेकिन जिसने भी आवेदन किया है उसकी नीयत और मंशा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
लापरवाही या साजिश?
इन अजीबोगरीब आवेदनों ने कई सवाल खड़े किए हैं. क्या यह महज सिस्टम से मजाक है या सरकार की छवि खराब करने की कोशिश? जानकारों का मानना है कि RTPS पोर्टल पर आवेदन सत्यापन की प्रक्रिया में खामियां हो सकती हैं. डिजिटल हस्ताक्षर और कर्मचारी सत्यापन की अनदेखी इन मामलों को बढ़ावा दे रही है. प्रशासन ने कुछ मामलों में FIR दर्ज की, लेकिन मधेपुरा मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

आगे का सबक क्या ?
इन घटनाओं ने RTPS पोर्टल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. ऐसे में प्रशासन को सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत है. इसके साथ ही आम जनता के बीच भी जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे मजाक या फर्जी आवेदनों पर रोक लगे. फिलहाल, मधेपुरा का ‘एयरफोन’ मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है.