झांसी – प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड और उसमें 15 लोगों की मौत की घटना ने झांसी में हुए अग्निकांड की घटनाओं की एक बार फिर से याद ताजा कर दी है। झांसी के सीपरी बाजार में तीन साल पहले और मेडिकल कॉलेज में दो साल पहले हुए दर्दनाक और भीषण अग्निकांड हादसे की याद कर अब भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हैरत की बात यह है कि इन घटनाओं से न तो किसी ने कोई सबक लिया न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई हुई। कागजी खानापूर्ति और बयानबाजी के बाद सारे अधिकारी और कर्मचारी जहां के तहां तैनात हैं और लापरवाही जस की तस कायम है।
सीपरी बाजार थानाक्षेत्र में एक वाणिज्यिक कम्प्लेक्स में लगी आग में चार लोगों की जलकर मौत हो गई थी। यह हैरत की बात है कि घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर दमकल का स्थानीय कार्यालय स्थित है। जांच और कार्रवाई के तमाम दावे हुए लेकिन राजनीतिक रसूख के दम पर आज भी धड़ल्ले से नियमों का उल्लंघन कर कमर्शियल कम्प्लेक्स बन रहे हैं। झांसी विकास प्राधिकरण के पास ऐसे अवैध कॉम्प्लेक्स की सूची है लेकिन कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी कर दिया जाता है और अवैध बिल्डिंग बनकर खड़ी हो जाती है। सीपरी बाजार अग्निकांड में किसे खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, आज तक किसी को नहीं बताया गया।
दो साल पहले मेडिकल कॉलेज में भीषण अग्निकांड हुआ जिसमें दस नवजात बच्चे जलकर मर गए थे। प्रधानमंत्री मोदी तक ने घटना पर दुख जाहिर किया था। कई जांच कमेटियां बनीं। कार्रवाई के दावे हुए लेकिन नतीजा शून्य। सबको बचा लिया गया। कागजी खानापूर्ति कर मामला खत्म हो गया। झांसी के लोगों को अब तक नहीं बताया गया कि मेडिकल कॉलेज में हुई अग्निकांड की घटना के लिए कौन सा शख्स या कौन सा विभाग दोषी था।
आज भी झांसी शहर में धड़ल्ले से मानकों का उल्लंघन कर कमर्शियल कम्प्लेक्स बन रहे हैं, जिनमें दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। झांसी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को चाहिए कि राजनीतिक रसूख की परवाह किए बिना नियमों का सख्ती से पालन कराएं। किसी नेता या व्यापारी के रसूख के कारण किसी इंसान की जिंदगी को दांव पर नहीं लगना चाहिए। भास्कर से साभार






