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8वीं पास, करोड़ों का साम्राज्य त्याग ‘बीकाजी’ से बनाई अरबों की पहचान; 40 देशों में धंधा फैलाकर कह गए अलविदा

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नई दिल्ली – बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल ने के संस्थापक, चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक शिव रतन अग्रवाल का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। कंपनी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी।

कंपनी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि अग्रवाल, एथनिक स्नैक्स और मिठाइयां बनाने वाली इस कंपनी की शुरुआत से ही एक मार्गदर्शक शक्ति रहे और उन्होंने ही ‘बिकाजी’ ब्रांड की नींव रखी थी।

अगर आप नमकीन, स्नैक्स आदि के शौकीन हैं तो आपने बीकाजी का कोई न कोई प्रोडक्ट जरूर टेस्ट किया होगा। भले ही आज भारत समेत 40 देशों में बीकाजी का कारोबार फैला हुआ है, लेकिन आज से 40 पहले कहानी कुछ और ही थी। वो कहानी थी एक रिस्क लेने की। आइए जानते हैं कि कैसे करोड़ों के साम्राज्य को त्याग कर शिव रतन अग्रवाल ने बीकाजी फूड्स की नींव रखी।

हल्दीराम की विरासत को त्यागा

हल्दीराम का नाम तो आपने सुना ही होगा। शिव रतन अग्रवाल इसी परिवार से संबंध रखते है। हल्दीराम की स्थापना 1937 में राजस्थान के बीकानेर में एक छोटी रिटेल नमकीन (स्नैक) की दुकान के रूप में हुई थी।

हल्दीराम की शुरुआत गंगा बिशन अग्रवाल ने की थी, जिन्हें प्यार से ‘हल्दीराम जी’ कहा जाता था। तब से यह एक प्रमुख मल्टीनेशनल स्नैक और फूड ब्रांड बन गया है। इसी ब्रांड को उनका परिवार आगे बढ़ा रहा था, लेकिन शिव रतन अग्रवाल ने खुद की पहचान बनाने के लिए परिवार की विरासत को त्याग दिया।

8वीं पास शिव रतन अग्रवाल ने चुनी अपनी राह

8वीं पास शिव रतन ने खुद का बिजनेस करके अपनी अलग पहचान बनाने की सोची। बीकाजी की आधिकारिक वेबसाइट https://www.bikaji.com/ पर मौजूद जानकारी के अनुसार 80 के दशक के आखिर में, शिवरतन अग्रवाल ने अपना खुद का रास्ता चुनने और अपनी एक नई पहचान बनाने का फैसला किया।

इसी से ‘बिकाजी’ ब्रांड का जन्म हुआ। उस समय, जब बड़े पैमाने पर भुजिया बनाने की तकनीक के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था, अग्रवाल ने अपने सपनों के इस सफर की नींव सफलतापूर्वक रखी। और बिकाजी की शुरुआत की।

वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार शिव रतन अग्रवाल ने न सिर्फ भुजिया बनाने के लिए सही तकनीक खोजने और उसे मिलकर विकसित करने के लिए पूरी दुनिया का सफर किया, बल्कि उन्होंने अपने ब्रांड के लिए एक ऐसा नाम भी ढूंढ़ निकाला जो आसानी से याद रह जाए और ग्राहकों से आसानी से जुड़ सके।

‘बिकाजी’ नाम ‘बिका राव’ (बीकानेर के संस्थापक) और ‘जी’ (भारत में सम्मान के तौर पर इस्तेमाल होने वाला शब्द) से मिलकर बना है।

18 हजार करोड़ के साम्रज्य के मालिक

2026 की शुरुआत तक, शिव रतन अग्रवाल की अनुमानित नेट वर्थ लगभग ₹15,279 करोड़ थी। उनकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा Bikaji Foods International में उनकी हिस्सेदारी से आया था। 31 मार्च, 2026 तक, उनके और उनके HUF के पास कंपनी की 58% से ज्यादा हिस्सेदारी थी, जिसका मूल्य ₹9,000 करोड़ से ज्यादा था।

23 अप्रैल 2026 को Bikaji Foods International Limited का मार्केट कैप 17,325.89 करोड़ रुपये था। कंपनी के शेयर 0.89 % बढ़कर 691 रुपये के स्तर पर बंद हुए।

40 से अधिक देशों में Bikaji के प्रोडक्ट्स

बीकाजी के उत्पाद दुनिया भर के 43 देशों में उपलब्ध हैं। कंपनी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत मौजूदगी है, जिसके प्रमुख बाजारों में उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया प्रशांत क्षेत्र शामिल हैं। उनके उत्पाद वॉलमार्ट और लुलु जैसी रिटेल चेन में उपलब्ध हैं।

Bikaji की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार Bikaji के पास 550 डिस्ट्रीब्यूटर का एक शक्तिशाली नेटवर्क है। इसके पास और भुजिया, नमकीन, पापड़, मिठाइयां, स्नैक्स, फ्रोजन फूड और इंस्टेंट फूड की 250 से अधिक वैरायटी उपलब्ध हैं