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आधी रात को नासिक में मची चीख-पुकार, अंधेरे कुएं में समा गई कार, एक ही गांव के 9 लोगों की मौत

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नासिक – आधी रात का सन्नाटा, चारों तरफ अंधेरा, अचानक एक तेज आवाज और फिर चीख-पुकार. नासिक के दिंडोरी में घटी यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और सिस्टम की खामियों का दर्दनाक उदाहरण बन गई है. एक खुला कुआं, एक अनियंत्रित कार और कुछ ही सेकंड में खत्म हो गई नौ जिंदगियां. सवाल सिर्फ हादसे का नहीं है, सवाल यह है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों होती हैं? क्या हमारी सड़कों और आसपास के खतरों को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता?
इस हादसे ने एक पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है. इंदोरे गांव के लोग अभी तक यकीन नहीं कर पा रहे कि जिनके साथ कल तक हंसी-खुशी थी, वे आज इस दुनिया में नहीं हैं. रात के अंधेरे में हुआ यह हादसा अब कई सवाल छोड़ गया है कि क्या इसे रोका जा सकता था? क्या थोड़ी सी सावधानी नौ जिंदगियां बचा सकती थी?
कैसे हुआ हादसा, कुएं में गिरने की क्या वजह?
  • शुरुआती जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात करीब 10 बजे कार दिंडोरी रोड पर जा रही थी. अचानक ड्राइवर का नियंत्रण बिगड़ा और कार सड़क किनारे खेत में बने खुले कुएं में जा गिरी. कुआं गहरा था और पानी से भरा हुआ था इससे कार सीधे अंदर समा गई. आसपास मौजूद लोगों को पहले समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है, लेकिन कुछ ही पलों में चीख-पुकार मच गई.
  • घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन अंधेरा, कीचड़ और गहराई ने बचाव कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया. देर रात क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से कार को बाहर निकाला गया. तब तक कार में सवार सभी नौ लोगों की मौत हो चुकी थी. करीब रात 1 बजे तक शवों को बाहर निकालने का काम पूरा हुआ.
एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में सबसे ज्यादा दर्दनाक पहलू यह है कि मरने वालों में एक ही परिवार के पांच सदस्य शामिल हैं. सुनील दत्तु दरगोड़े, उनकी पत्नी राखी, उषा, श्रद्धा और श्रावणी सभी एक साथ इस हादसे का शिकार हो गए. गांव में हर घर में मातम पसरा है. जिन घरों में कल तक खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा है और आंसुओं की आवाज सुनाई दे रही है.
प्रशासन और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं. आखिर खेत में बना कुआं खुला क्यों था? क्या वहां कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था? ऐसे खतरनाक स्थानों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है. अब देखना होगा कि इस हादसे के बाद क्या कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा