भारत में बीते 48 घंटे काफी हंगामेदार रहे। पहले 20 जुलाई (सोमवार) को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर से संसद चलो मार्च के दौरान दिल्ली में युवाओं और छात्रों का पुलिस से टकराव हुआ। इसके बाद 21 जुलाई (मंगलवार) को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने पीएम आवास के बाहर धरना दिया। महज चार-पांच घंटे चले इस धरने के दौरान टकराव की स्थिति देखने को मिली और राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में इन्हें छोड़ भी दिया गया। हालांकि, इन प्रदर्शनों के जरिए जो चिंगारी भड़की, उन्हें दुनियाभर में भी काफी करीबी निगाह से देखा गया।
छात्रों-विपक्ष के प्रदर्शन पर वैश्विक मीडिया में क्या चर्चा हुई?
वैश्विक मीडिया ने भारत में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन को बड़े पैमाने पर कवर किया और इसे हाल के वर्षों में मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन के रूप में देखा है।
1. बीबीसी
बीबीसी ने इस आंदोलन को हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष की सबसे बड़ी और स्पष्ट अभिव्यक्तियों में से एक करार दिया। इसने तिरंगा लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और रास्तों को सील करने वाली पुलिस के बीच के तीखे अंतर को उजागर किया, जहां पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारी सिर से खून बहते हुए या लंगड़ाते हुए वापस लौटे।
2. द न्यूयॉर्क टाइम्स
अखबार ने रिपोर्ट दी कि दिल्ली की सड़कों पर अराजक दृश्य देखने को मिले, जहां पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि एक तरफ जहां संसद में ‘मुस्कुराते हुए मोदी’ शांति दिखाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ युवा सड़कों पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे। अखबार ने कहा है कि सरकार की ओर से युवाओं के इस भारी गुस्से को कम आंकने से मोदी की मजबूत नेता की छवि पर असर पड़ा है।
द गार्डियन ने विपक्ष के प्रदर्शन पर भी विस्तृत रिपोर्ट छापी। अखबार ने कहा कि पुलिस ने राहुल गांधी को हाथ और पैर से पकड़कर जबरन भीड़ से निकाला और एक बस में डाल दिया, जब वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे थे। राहुल ने पीएम मोदी पर भारत के युवाओं का भविष्य तबाह करने का आरोप लगाया।
6. सीएनएन
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनएन ने इन प्रदर्शनों को दिल्ली की सड़कों पर उबलता राजनीतिक गुस्सा करार दिया है। सीएनएन ने बताया कि मुख्य रूप से युवा प्रदर्शनकारियों को आंसू गैस और पुलिस के डंडों का सामना करना पड़ा। सोमवार को हुई हिंसा में करीब 150 प्रदर्शनकारी घायल होकर अस्पताल पहुंचे और पुलिस की बर्बरता के वीडियो वायरल होने के बाद सरकार की ओर से इंटरनेट बंद करने के आदेश से लोगों का आक्रोश और भड़क गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार आलोचकों के निशाने पर है, जिनका मानना है कि इस सरकार ने अपने एक दशक से अधिक के शासन में लगातार असहमति को बेरहमी से कुचला है। सीएनएन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच से किए जाने के बाद जो आंदोलन एक मजाक के रूप में शुरू हुआ था, वह अब लाखों युवाओं की हताशा को व्यक्त करने वाली एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गया है।
रिपोर्ट में प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके आवास के बाहर धरना दे रहे विपक्षी नेताओं को लेकर भी बात की गई है।
7. द वॉल स्ट्रीट जर्नल और एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी)
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने छात्रों के इस आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए इसे उन सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया है जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कई वर्षों में सामना किया है।






