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पहले 5 और अब 10 दिन…ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को फिर झुकाया, होर्मुज न खुला तो अमेरिका ने लिया यूटर्न

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज यानी शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहुत अच्छी चल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ईरान की ऊर्जा संरचना पर हमलों को 10 दिन के लिए और रोक देगी. यानी अमेरिका ने होर्मुज खोलने की डेडलाइन 6 अप्रैल तय कर दी है.
ईरान जंग पर डोनाल्ड ट्रंप ने मजबूरी में एक और यूटर्न लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को होर्मुज खोलने की डेडलाइन 27 मार्च तय की थी. जब ईरान ने न होर्मुज खोला और न झुका तो मजबूरी में अमेरिका को ही नई तारीख देनी पड़ी है. जी हां, अमेरिका ने अब इसकी मियाद एक बार फिर बढ़ा दी है. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलने की अपनी डेडलाइन 6 अप्रैल तक बढ़ा दी है. डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी. उन्होंने यह भी कहा कि 6 अप्रैल तक वह ईरान के एनर्जी प्लांट पर बमबारी नहीं करेंगे.
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहुत अच्छी चल रही है. उनकी सरकार ईरान की ऊर्जा संरचना पर हमलों को 10 दिन के लिए और रोक देगी. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को पांच दिन की मोहलत दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि 5 दिन में अगर होर्मुज नहीं खुला और ईरान बातचीत की टेबल पर नहीं आया तो उसके ऊपर अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा. उसके एनर्जी ठिकानों के निशाना बनाया जाएगा. मगर ईरान के तेवर को देखते हुए ट्रंप ने मियाद खत्म होते ही नई तारीख दे दी.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा, ‘ईरानी सरकार के अनुरोध पर कृपया इस बयान को यह दर्शाने दें कि मैं ऊर्जा संयंत्रों के विनाश की अवधि को 10 दिन के लिए सोमवार 6 अप्रैल 2026, शाम 8 बजे (पूर्वी समय) तक रोक रहा हूं. बातचीत जारी है और फेक न्यूज मीडिया और अन्य द्वारा गलत बयानबाजी के बावजूद वे बहुत अच्छी चल रही हैं.’
ट्रंप ने क्या धमकी दी थी
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले धमकी दी थी कि अगर तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला तो वह ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करेंगे. हालांकि, बाद में उन्होंने बहुत उत्पादक बातचीत का हवाला देते हुए हमलों पर पांच दिन की रोक की घोषणा की थी. यह रोक आज यानी शुक्रवार को खत्म होने वाली थी.
ईरान ने भी धमकाया
वहीं, ईरान ने धमकी दी थी कि अगर डोनाल्ड ट्रंप आगे बढ़ते हैं तो वह क्षेत्र के महत्वपूर्ण ढांचे, जैसे डीसैलिनेशन सुविधाओं पर जवाबी हमला करेगा. ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता तो तेहरान पर पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हमला होगा.
ईरान जंग पर क्यों अहम है यह अपडेट
यह अपडेट तब आया है, जब दोनों देशों के बीच सीजफायर की बातचीत को लेकर अलग-अलग राय है. अमेरिका अपनी शर्तों पर सीजफायर चाहता है तो ईरान अपनी शर्तों पर. इस बीच ईरान जंग खत्म करने की कवायद के बीच हजारों अमेरिकी सैनिक इस इलाके के पास पहुंच गए. उधर इजरायल ने ईरान के सपोर्ट वाले मिलिटेंट ग्रुप हिजबुल्लाह से लड़ने के लिए दक्षिणी लेबनान में और सैनिक भेजे हैं. दूसरी तरफ तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है.
ईरान ने होर्मुज कर रखा है बंद
गौरतलब है कि ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर हमले किए हैं. साथ ही 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ईंधन निर्यात को प्रभावी रूप से रोक दिया है. अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की कि ईरान को युद्ध समाप्त करने के लिए 15 बिंदुओं की कार्य सूचीभेजी गई है, जिसे तेहरान ने एकतरफा कहकर खारिज कर दिया.
ट्रंप बोले, ईरान ‘समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है’
एक दिन बाद जब ईरान ने युद्धविराम योजना को खारिज किया. तो ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है और वह खुद बातचीत के लिए दबाव नहीं बना रहे हैं. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बिना कोई विशेष धमकी दिए कहा कि ईरानी नेताओं को बहुत देर होने से पहले बातचीत करनी चाहिए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया तो वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा.
अब्बास अराघची ने क्या कहा?
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने राज्य टीवी पर एक इंटरव्यू में कहा कि उनकी सरकार युद्ध समाप्त करने के लिए किसी भी बातचीत में शामिल नहीं हुई है और हम किसी भी बातचीत की योजना नहीं बना रहे हैं. साथ ही कहा कि तेहरान लड़ाई जारी रखने का इरादा रखता है. युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने अपना रुख और सख्त कर लिया है. भविष्य में सैन्य कार्रवाई से सुरक्षा की गारंटी, नुकसान की भरपाई और होरमुज जलडमरूमध्य पर औपचारिक नियंत्रण की मांग की है.