रायपुर – छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी मनोहर लाल डेंगवानी के पास करीब 1500 रेडियो का नायाब कलेक्शन है. खास बात यह है कि इनमें 754 रेडियो ऐसे हैं, जो चालू हालत में हैं. वह साल 1970 से यह कलेक्शन कर रहे हैं.
रायपुर का अनोखा रेडियो लवर
मनोहर लाल डेंगवानी ने बताया “बचपन से रेडियो सुनने का शौक था. नींद खुलते ही रेडियो सुनने की आदत थी. बड़े बुजुर्ग रेडियो के दीवाने थे. वही दीवानगी आज तक बरकरार है. 1948 से लेकर आज तक के रेडियो के मॉडल का कलेक्शन है.
मेंटेनेंस करना है मुश्किल
मनोहर लाल डेंगवानी ने बताया कि “रेडियो को संभाल कर रखना काफी कठिन और दुष्कर कार्य हैं. रेडियो को नियमित रूप से चालू भी करना होता है. महीने में एक बार रेडियो नियमित रूप से चलाना पड़ता है. अगर इसे एक महीने में नहीं चलाते हैं तो रेडियो जाम होने के साथ ही खराब होने की स्थिति में पहुंच जाती है. रेडियो के प्वाइंटर जाम होने के साथ ही रेडियो के वॉल्यूम में खराबी आने लगती है. प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक 15 से 20 रेडियो को हम लोग चलाया करते हैं.
1940 के रेडियो के बारे में उन्होंने बताया कि यह देश के विभाजन के दौर का रेडियो है. इस रेडियो से हमारे परिवार की यादें जुड़ी हुई है. विभाजन के समय भारत का नेटवर्क ब्रिटिश गवर्नमेंट से चलता था. वह सारा चीज इस रेडियो में मौजूद है. ऐसे शहरों के नाम भी देख सकते हैं, जो विभाजन के पूर्व भारत में थे.”
पांच पीढ़ी ने एक ही रेडियो को सुना
रेडियो कलेक्शन करने वाले मनोहर लाल डेंगवानी बताते हैं कि “1940 के रेडियो को हमारे दादाजी, पिताजी और मेरे साथ ही मेरा बेटा और मेरा पोता भी सुन रहे है. इस तरह से हमारे पांच पीढ़ी इस रेडियो को सुन चुकी है. भारत के लेखक बुद्धिजीवी कलाकार गीतकार संगीतकार मंत्री और राज्यपाल सभी ने इस रेडियो की तारीफ की है.
रेडियो सुनने वाले की संख्या के बारे में मनोहर लाल बताते हैं कि “रेडियो सुनने वालों की संख्या बीच में कुछ ठहर सी गई थी, लेकिन अब रेडियो सुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. देश के प्रधानमंत्री के द्वारा रेडियो के माध्यम से मन की बात का प्रसारण दूसरा एफएम के माध्यम से गांव-गांव तक जुड़ गए. इसका तीसरा कारण यह है कि रेडियो अब डीटीएच में चलने लगा है.
मनोहर लाल कहते हैं कि अब वर्तमान समय में मोबाइल ऐप में भी आदमी आसानी से रेडियो सुन सकता है. जिसकी वजह से रेडियो सुनने वाले श्रोताओं की संख्या बड़ी है. पहले भारत में रेडियो सुनने वाले श्रोताओं की संख्या साढ़े तीन करोड़ हुआ करती थी, जो आज बढ़कर 40 करोड़ पर पहुंच गई है.ETV से साभार






