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महाशिवरात्रि – जब पंचमुखी शिव की शक्ति के आगे थम गई ब्यास की धार, प्रचंड सैलाब के बीच भी अटल रहा पंचवक्त्र महादेव मंदिर

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मंडी –  15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हम आपको देवभूमि हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर के उस शिव मंदिर के बारे में बताएंगे जो ब्यास नदी के तट पर स्थित है और करीब 550 वर्ष पुराना है, जिसने 2023 की विनाशकारी बाढ़ में जिस तरह आस्था और स्थापत्य की मिसाल पेश की. हम बात कर रहे है पंचवक्त्र महादेव मंदिर की.

2013 का वह भयावह दृश्य देश आज भी नहीं भूला है, जब उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया था. घर, होटल, दुकानें सब मलबे में समा गए थे, लेकिन उस प्रलय के बीच केदारनाथ मंदिर अडिग खड़ा रहा. उसी तरह 2023 में हिमाचल प्रदेश ने भी प्रकृति का रौद्र रूप देखा. भारी वर्षा और ब्यास नदी के उफान ने मंडी शहर में तबाही मचाई. कई घर और दुकानें बह गईं, पुराना लोहे का पुल नदी में समा गया, लेकिन ब्यास और सुकेती नदियों के संगम पर स्थित पंचवक्त्र महादेव मंदिर प्रचंड सैलाब के बीच भी अटल रहा.

जब पानी में डूब गया था पूरा मंदिर

2023 की आपदा के दौरान ब्यास नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया था कि पंचवक्त्र मंदिर पूरी तरह पानी में डूब गया था. सैलाब की तस्वीरों ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया था. मंदिर का शिखर ही पानी के ऊपर दिखाई दे रहा था. वह दृश्य 2013 के केदारनाथ की याद दिला रहा था.

मंदिर परिसर में करीब 10 से 12 फीट तक गाद और मलबा भर गया था. प्रांगण में विराजमान विशाल नंदी महाराज भी गाद में दब गए थे. मुख्य द्वार को क्षति पहुंची थी, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि गर्भगृह में स्थापित पंचमुखी शिव प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं हुआ. भारी मलबे और तेज धाराओं के बावजूद मंदिर की संरचना जस की तस रही. स्थानीय लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते. उनका कहना है कि जिस तरह केदारनाथ मंदिर ने 2013 में प्रलय का सामना किया था, उसी तरह पंचवक्त्र महादेव ने 2023 में ब्यास की लहरों को चुनौती दी.

‘छोटी काशी’ की पहचान

हिमाचल का मंडी शहर ‘छोटी काशी’ के नाम से प्रसिद्ध है. जैसे काशी गंगा नदी के तट पर बसी है, वैसे ही मंडी ब्यास नदी के किनारे स्थित है. यहां शिव के अनेक प्राचीन मंदिर हैं. भूतनाथ, त्रिलोकीनाथ, अर्धनारीश्वर और पंचवक्त्र महादेव. इन मंदिरों की वजह से मंडी को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है. पंचवक्त्र मंदिर सुकेती और ब्यास नदी के संगम पर स्थित है. यही संगम इसे आध्यात्मिक रूप से और भी पवित्र बनाता है. संगम स्थल पर स्थित होने के कारण यह मंदिर सदियों से प्रकृति के उतार-चढ़ाव का साक्षी रहा है.