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छत्तीसगढ: माओवाद प्रभावित कोंडागांव की योगिता मंडावी को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

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रायपुर – छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के दूर-दराज माओवाद प्रभावित गांव की 14 साल की जूडो खिलाड़ी योगिता मंडावी को पीएम राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया है। योगिता को ये सम्मान जूडो खेल में उतकृष्ट प्रदर्शन को लेकर मिला है। मात्र 14 वर्ष की आयु में योगिता मंडावी ने राज्य की श्रेष्ठ जूडो खिलाड़ी का दर्जा प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगातार पदक अर्जित कर अपनी निरंतर प्रगति और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने योगिता मंडावी को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया है।

कोंडागांव के फरसगांव ब्लॉक के हिर्री गांव में जन्मी योगिता ने सामाजिक चुनौतियों को पार करते हुए नेशनल लेवल पर जूडो में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मिली जानकारी के मुताबिक योगिता मुश्किल से चार साल की थी जब उसने अपने पिता मायाराम मंडावी और मां सुकमती मंडावी को खो दिया था। जनवरी 2021 में उसे जिला प्रशासन की मदद से कोंडागांव में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह में भर्ती कराया गया। इससे पहले योगिता चाचा और चाची की देखरेख में पली।

10 साल की उम्र में योगिता ने जूडो खेलना शुरू किया और जल्द ही उसने कमाल का टैलेंट दिखाया। एक साल के अंदर, उसने स्टेट लेवल पर मेडल जीतना शुरू कर दिया, जिससे एक होनहार खिलाड़ी के आने का संकेत मिला। उसकी तरक्की लगातार और शानदार रही है। 2024 में योगिता ने दुर्ग में स्टेट-लेवल स्कूल जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड और नासिक में खेलो इंडिया रीजनल कॉम्पिटिशन के साथ-साथ केरल में खेलो इंडिया नेशनल जूडो चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 2025 में उसने स्टेट-लेवल ओपन जूडो और स्कूल जूडो कॉम्पिटिशन में गोल्ड जीता। इसके अलावा हैदराबाद में नेशनल ओपन जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीता।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योगिता की सफलता को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सोर्स बताया। सीएम ने कहा की उनका सफर दिखाता है कि जब कड़ी मेहनत और अपने सपनों के प्रति पक्के इरादे के साथ काम किया जाए तो रिसोर्स की कमी सफलता में रुकावट नहीं बन सकती। योगिता की यह कामयाबी न सिर्फ़ छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश भर के चाइल्ड वेलफेयर इंस्टीट्यूशन में बड़े हो रहे बच्चों के लिए भी एक मज़बूत मैसेज है कि पक्के इरादे और डिसिप्लिन से, सबसे मुश्किल शुरुआत भी बड़ी मंज़िल तक पहुँच सकती है।