महासचिव का आदेश फाड़ा, सदस्यता शुल्क और नई सदस्यता पर टकराव तेज
रायपुर – रायपुर प्रेस क्लब में संभावित चुनाव की घोषणा से पहले ही खींचतान चरम पर पहुंच गई है। प्रेस क्लब में चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है संविधान संशोधन हो , सदस्यों का नाम काटा जाना हो या नए सदस्यों के नाम जुड़े जाना मामला हो, संस्था के भीतर इस बात को लेकर असहमति लगातार बनी रही, मौजूदा कार्यकारिणी से इस बात का विरोध कई पत्रकार पिछले कई महीनो से कर रहे हैं अब पंजीयक के संबंध में मिले निर्देश पर मतभेद कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
क्रोमा शोरूम के पास वाहन टक्कर के बाद दो पक्षों में हिंसक झगड़ा विवाद उस समय गहराया जब महासचिव वैभव पांडे ने पंजीयक के निर्देशों के पालन में 60 दिन के भीतर चुनाव कराने और नई सदस्यता प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। लेकिन कार्यवाहक अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने इस आदेश को सिरे से खारिज करते हुए सूचना पट्ट पर चिपकाए गए आदेश को फाड़ डाला। अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने व्हाट्सएप के ग्रुपों में कि सदस्यता शुल्क और नई सदस्यता को लेकर कोई समझौता नहीं होने के संकेत देकर अपनी बात पर अड़े हुए है, वहीं महासचिव वैभव पांडेय का कहना है कि वे केवल पंजीयक फॉर्म एवं सोसायटी के आदेशों का पालन करना चाहिए।
छग की NSS कार्यक्रम अधिकारी को राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित, CM साय ने दी बधाई आदेश मानें किसका, पंजीयक का या अध्यक्ष का?: अब सवाल यह है कि मान्य आदेश किसका माना जाए, पंजीयन विभाग का या अध्यक्ष का? इसी भ्रम ने संस्था को दो खेमों में बांट दिया है। कार्यकारिणी के कई सदस्य इस मुद्दे पर खुलकर दो हिस्सों में बंट गए हैं। सहमित औऱ असहमति के ताजा घटना के बाद प्रेस क्लब में माहौल और गरमा गया है। अध्यक्ष और महासचिव के मतभेद चर्चा में है । इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।संस्था के भीतर का विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है।
ज्वेलरी दुकान में 8 लाख की चोरी, मुंह ढके चोर सीसीटीवी में कैद वरिष्ठ पत्रकारों की चिंता : क्लब के वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि जब कार्यकारिणी में ही सहमति नहीं है, तो चुनाव किसी निष्पक्ष अधिकारी की निगरानी में कराए जाएं। वरिष्ठों का कहना है कि अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो प्रेस क्लब की साख पर आंच आ सकती है।
बताया जाता है अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने करीब 253 नए सदस्य जोड़े और 125 पुराने सदस्यों के नाम हटाने की जद्दोजहद में दो जहाजों में पैर रखने जैसा है क्योंकि इससे क्लब का वोट समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। क्लब की परंपरा रही है कि चुनाव से ठीक पहले किसी नए सदस्य को वोटिंग राइट नहीं दिया जाता। लेकिन इस बार चुनावी समीकरण साधने के लिए अध्यक्ष इस नियम को भी दरकिनार करने पर आमादा हैं। जीत के समीकरण को साधने के लिए अध्यक्ष नियम विरुद्ध कार्यकाल समाप्त होने के बाद येन चुनाव के पहले सदस्यता देने की जिद है और यही वजह है कि पंजीयक के दो – दो आदेश को दरकिनार कर गए है। प्रफुल्ल ठाकुर अपनी जीत की नैया नए सदस्यों के जरिए पार करना चाहते हैं, अब महासचिव के द्वारा दिए गए आदेश को भी उन्होंने जूते की नोंक पर रख दिया है । ऐसे में प्रेस क्लब में चुनावी दंगल के पहले आपसी मतभेद का दंगल से प्रेस क्लब ने दो फाड़ जैसी स्थिति देखने को मिल रही है
अब आगे क्या…? : संस्था के भीतर जारी इस रस्साकशी के बीच अब सभी की निगाहें फिर एक बार पंजीयक की ओर है। अगर स्थिति यथावत रही, तो संभावना है कि प्रेस क्लब का चुनाव प्रशासनिक निगरानी में कराया जा सकता है। वरिष्ठ पत्रकारों ने टिप्पणी की: संस्था व्यक्तिगत अहंकार का मंच नहीं, बल्कि पत्रकारों की गरिमा का प्रतीक है। इसे विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए। 1968 से गठित रायपुर प्रेस क्लब के इतिहास में पहली बार ऐसा टकराव देखा जा रहा। अधिकतर वरिष्ठ पत्रकारों में नाराजगी, प्रेस क्लब की गरिमा को तार-तार करने पर प्रफुल्ल ठाकुर से नाराज हैं दूसरी तरफ फर्जी पत्रकारों ने बदनाम किया हुआ है,
वरिष्ठ पत्रकारों ने यह भी कहा कि प्रेस क्लब में निवर्तमान अध्यक्ष की अहम और हठधर्मिता प्रेस क्लब की छवि खराब कर रहा प्रफुल्ल ठाकुर सहित एक दो पदाधिकारी चुनाव टालने की फिराक में है वहीं महासचिव डॉ शिव वैभव पाण्डेय बेमेतरिहा ने चुनाव में देरी पर खेद प्रकट करते हुए जल्द चुनाव कराने आदेश निकाला जिसे निवर्तमान अध्यक्ष ने फाड़ कर अपनी तानाशाही का परिचय दिया है। वर्तमान में जब फर्जी पत्रकारों और वसूलीबाज पत्रकारों की बाढ़ सी आ गई है एैसे नाजुक वक्त में प्रेसक्लब को पत्रकारों में एकजुट रखना चाहिए लेकिन निवृत्तनाम अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर ने प्रेसक्लब की गिरमा को ठेस पहुंचाया है।- इस संबंध में प्रफुल्लठाकुर का पक्ष जानने फोन लगाया गया लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।






