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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी विजयादशमी का दिया संदेश ₹ 33.71

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रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बार की विजयादशमी को ऐतिहासिक और विशेष अवसर बताया। उनका कहना है कि इस दिन केवल धर्म और संस्कृति का उत्सव ही नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने की वर्षगांठ भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक शताब्दी की यह यात्रा न केवल अद्भुत और अभूतपूर्व है, बल्कि अत्यंत प्रेरक भी है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह उपलब्धि सिर्फ संगठन की नहीं, बल्कि लाखों-लाख स्वयंसेवकों के जीवन के हर कर्म और प्रयास की परिणति है।

राष्ट्र प्रथम की भावना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करते रहे हैं। यह भावना उनकी सभी गतिविधियों, समाज सेवा और संगठनात्मक प्रयासों में सर्वोपरि रही है। उन्होंने बताया कि इस सिद्धांत ने संगठन को सशक्त और प्रेरक बनाया और इसे 100 वर्षों तक कायम रखा। विष्णुदेव साय ने यह भी कहा कि संघ के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य निरंतर होता रहा है। स्वयंसेवक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं और समाज को नई दिशा देने में योगदान करते हैं।

समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि संघ की शताब्दी यात्रा युवाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि न केवल अपने जीवन में अनुशासन और समर्पण अपनाएं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। उन्होंने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान देने, और सामूहिकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का कार्य लगातार कर रहे हैं। इस शताब्दी वर्ष में उनका योगदान विशेष रूप से सराहनीय है।

विजयादशमी के महत्व और उत्सव मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी का उत्सव हमेशा सत्य और धर्म की जीत का प्रतीक रहा है। इस बार का उत्सव संघ के 100 वर्ष पूरे होने के कारण और भी खास बन गया है। यह अवसर राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी, समर्पण और प्रेरणा की याद दिलाता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस विजयादशमी को संस्कार, संस्कृति और राष्ट्र सेवा के दृष्टिकोण से मनाएं। यह दिन केवल उत्सव का ही नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों और समाज सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है।