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गणेशोत्सव में DJ के लिए सख्त नियम – अब जोन कमिश्नर और थाना प्रभारी से NOC अनिवार्य

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रायपुर – गणेशोत्सव के दौरान शोर-शराबे और ट्रैफिक जाम की शिकायतें बढ़ने के बाद प्रशासन ने  नियम कड़े कर दिए हैं। रायपुर में इस बार किसी भी वार्ड में डीजे बजाने से पहले संबंधित जोन कमिश्नर और थाना प्रभारी- दोनों की NOC जरूरी होगी, तभी आवेदन स्वीकार होगा। बिना NOC डीजे की अनुमति नहीं दी जाएगी और उल्लंघन पर उपकरण जब्त किए जाएंगे।

प्रशासन ने साफ किया है कि ध्वनि स्तर 75 डेसिबल से कम रखना होगा और आयोजक को लिखित में देना होगा कि डीजे के कारण सड़क पर जाम नहीं लगेगा। शहर भर में यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू रहेगी।

आयोजक या समिति को पहले अपने वार्ड के जोन कमिश्नर कार्यालय में कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण, स्थान, तारीख-समय, ध्वनि-सिस्टम का विवरण, जिम्मेदार पदाधिकारियों के नाम- मोबाइल नंबर और यह लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि ध्वनि सीमा का पालन होगा और मार्ग अवरुद्ध नहीं किया जाएगा।

इसके बाद वही प्रस्ताव संबंधित थाने में जमा कर पुलिस से सुरक्षा और ट्रैफिक प्लान की सहमति लेनी होगी। संयुक्त सहमति के बाद ही अंतिम NOC जारी होगी। सलाह है कि आयोजन की तिथि से कई दिन पहले आवेदन करें ताकि तकनीकी आपत्तियों का निवारण समय पर हो सके।

कहाँ- कहाँ डीजे पर रोक, और कब चल सकेंगे स्पीकर

अस्पताल, स्कूल, कोर्ट और ऐसे सार्वजनिक संस्थानों के 100 मीटर दायरे को साइलेंस ज़ोन माना जाएगा, यहाँ डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सामान्य दिनों में निर्धारित ध्वनि-सीमा के भीतर ही साउंड सिस्टम चल पाएगा।

विसर्जन और झांकी के लिए विशेष प्रावधान के तहत डीजे का उपयोग रात 10 बजे के बाद किया जा सकेगा, लेकिन यह भी केवल तय रूट और तय समय-सीमा में, तथा 75 डेसिबल से नीचे रहेगा। आयोजक को यह सुनिश्चित करना होगा कि एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए रास्ता हमेशा खुला रहे और स्पीकरों की दिशा आवासीय बस्तियों व संवेदनशील संस्थानों की ओर न हो।

डीजे बजाने के नए नियम

प्रशासन के निर्देश अनुसार साउंड कंसोल, स्पीकर की संख्या और पावर–लोड पहले से डिक्लेयर करनी होगी और अनधिकृत हाई-वाटेज एम्प्लीफायर न लगाए जाएँ। डीजे वाहन की पार्किंग और जन- मार्ग बाधित न हो, इसके लिए आयोजक अपने स्वयंसेवक तैनात करेंगे और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करेंगे।

बिजली कनेक्शन सुरक्षित होना चाहिए, डीजी-सेट का मफलर ठीक स्थिति में रहे, और तार–जॉइंट खुले में न हों। कार्यक्रम स्थल पर जिम्मेदार नोडल व्यक्ति मौजूद रहेगा जिसकी पहचान पुलिस और जोनल टीम को पहले से उपलब्ध कराई जाएगी। स्पॉट पर ध्वनि-स्तर नापा जा सकता है और सीमा पार होते ही संगीत तुरंत बंद कराना आयोजक की जिम्मेदारी होगी।

किन धाराओं में हो सकती है कार्यवाही

NOC शर्तों का उल्लंघन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और Noise Pollution (Regulation & Control) Rules, 2000 के तहत दंडनीय है। ऐसे मामलों में उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, कार्यक्रम रद्द कराया जा सकता है, और आयोजक पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

गंभीर/बार-बार उल्लंघन पर FIR दर्ज होकर पर्यावरण कानूनों के तहत एक लाख रुपये तक के आर्थिक दंड और कठोर सजा का प्रावधान लागू हो सकता है; सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना पर धारा 188 IPC और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़ी धाराएँ भी लग सकती हैं। सटीक दंड और जुर्माने की राशि जिला–स्तरीय आदेशों और केस की परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी, इसलिए अपनी NOC की शर्तें ध्यान से पढ़ें और उनका अक्षरशः पालन करें।

किन वजहों से NOC नहीं मिलेगी ?

यदि स्थल साइलेंस ज़ोन में आता है, मार्ग अत्यंत संकरा है और भीड़–नियंत्रण संभव नहीं, आयोजक का पिछला रिकॉर्ड खराब है, या ट्रैफिक/कानून–व्यवस्था को जोखिम है, तो आवेदन रिजेक्ट किया जा सकता है। अधूरे दस्तावेज, अस्पष्ट रूट–मैप, विरोधाभासी समय–अनुरोध या ध्वनि–सीमा का अनापत्ति–पत्र न देने पर फाइल लंबित हो सकती है। इसलिए रूट-मैप, कार्यक्रम तालिका, संपर्क सूची, जमीन/स्थल की अनुमति और सुरक्षा योजना साफ–साफ प्रस्तुत करें।

यह सख्ती क्यों ?

बीते वर्षों में डीजे के तेज शोर से बुजुर्गों, बच्चों और अस्पताल क्षेत्र के मरीजों को परेशानी हुई, साथ ही जुलूस के दौरान अनियोजित रूट के कारण शहर में ग्रिडलॉक की स्थिति बनी। प्रशासन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य उत्सव की आस्था को सुरक्षित रखते हुए नागरिकों की आराम, स्वास्थ्य और यातायात को प्राथमिकता देना है। जिम्मेदार आयोजन से न केवल शहर की कानून–व्यवस्था बेहतर रहती है बल्कि उत्सव का आनंद भी सब तक पहुँचता है।

उपयोगी सलाह

समय रहते आवेदन करें, सभी कागज़ात की सॉफ्ट व हार्ड कॉपी साथ रखें, स्वयंसेवकों को ब्रिफ़ करें, और मौके पर एक कम्प्लायंस डायरी बनाएँ जिसमें ध्वनि–जांच का समय, पुलिस निरीक्षण और निर्देश नोट हों। यदि मार्ग में अचानक भीड़ बढ़े तो संगीत बंद कर पहले मार्ग साफ कराएँ, फिर नियंत्रित गति से जुलूस आगे बढ़ाएँ। पारंपरिक ढोल–ताशा और सांस्कृतिक प्रस्तुति जैसे विकल्प ध्वनि–सीमा में रहकर उत्सव को और आकर्षक बनाते हैं।