इजरायल अपनी पूरी ताकत लगाकर ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को तबाह कर देना चाहता है. उसने इसे काफी नुकसान भी पहुंचाया है लेकिन वो इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता है. इजरायल के घातक हथियार भी …और पढ़ें
इज़राइल ने ईरान पर किए गए हवाई हमलों में परमाणु केंद्रों पर जमकर मिसाइलें और बम बरसाए हैं. सवाल ये उठता है कि इससे न्यूक्लियर सेंटर्स का कितना नुकसान हुआ है? मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइन इमेज देखने पर पता चलता है कि जमीन पर मौजूद रिसर्च सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ये हमले हजारों केंद्रफ्यूजर्स को शायद ही नष्ट कर पाए हैं. ईरानी विशेषज्ञों की मानें तो उसके पास पहले से मौजूद सैकड़ों पाउंड यूरेनियम भी अब तक सुरक्षित हैं.
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन हमलों को शुरू करते हुए कहा था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम इज़राइल के लिए एक अस्तित्व खतरा है और इसे पूरी तरह खत्म किया जाएगा. उन्होंने हमलों के बाद दावा किया था कि हमने ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम के दिल पर हमला किया. अब दोनों देशों से आ रहे वीडियो और सैटेलाइट इमेज ये कंफर्म कर रहे हैं कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को ऐसा कोई नुकसान नहीं हुआ है, जो इसे स्थायी तर पर खत्म कर सके.
परमाणु केंद्रों की लोकेशन है खास
जिस न्यूक्लियर सेंटर पर इजरायल ने ताज़ा हमले किए हैं, वो फोर्डो परमाणु केंद्र कोम शहर से 20 मील दूर एक पहाड़ी के अंदर बनाया गया है. सिर्फ बमबारी से इसे तोड़ना मुमकिन नहीं है . इसकी सुरक्षा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्म्स देखता है, जो इसके बेस में ही मौजूद है. पहाड़ों के अंदर गहराई में खुदा हुआ ये न्यूक्लियर किला ज़मीनी सतह से करीब 90 मीटर नीचे है, जो इसे बेहद सुरक्षित बनाता है. साल 2009 में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटिश इंटेलिजेंस ने दुनिया को इसकी जानकारी दी थी. इस केंद्र में करीब 60 फीसदी तक शुद्ध यूरेनियम बनाया जा चुका है, जबकि ईरान को 90 फीसदी शुद्ध यूरेनियम परमाणु अस्त्र बनाने के लिए चाहिए.
क्यों इजरायल के हत्थे नहीं चढ़ रहा न्यूक्लियर सेंटर?
इजरायल के पास इतने एडवांस हथियार हैं कि उसने फोर्डो पर जब हमला किया, तो आसपास के इलाके में भूकंप आ गया. बावजूद इसके ईरानी सूत्रों का कहना है कि इससे फोर्डो को नुकसान तो हुआ है, लेकिन इतना भी नहीं कि ये तबाह हो गया हो. मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि इजरायल के पास फोर्डो को खत्म कर देने वाले बम नहीं हैं. इसकी किलेबंदी को सिर्फ बंकर बस्टर्स ही नष्ट कर सकते हैं लेकिन इसे गिराने के लिए स्पेशल B-2 बॉम्बर्स चाहिए, जो सिर्फ अमेरिका के ही पास है. IAEA ने भी ये बात स्पष्ट की है कि इजरायल ने ईरान के नतांज़, इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर्स को आंतरिक रूप से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ.
अमेरिका क्यों नहीं दे रहा इजरायल को ब्रह्मास्त्र?
अमेरिका के पास बंकर बर्स्टर्स भी हैं और B-2 बॉम्बर भी, वो इजरायल का सहयोगी भी है, तो फिर वो इजरायल को इसे दे क्यों नहीं रहा है? टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट पीटर वाइल्डफोर्ड का कहना है कि अमेरिका इस लड़ाई में सीधे घुसना नहीं चाहता है. उन्होंने एक आर्टिकल में लिखा – ‘अमेरिका फोर्डो को उड़ाने की क्षमता रखता है लेकिन उसमें राजनैतिक इच्छाशक्ति नहीं है. वहीं इजरायल के पास इच्छाशक्ति है पर हथियार नहीं.’ ये अगर एक साथ नहीं आए, तो इजरायल फोर्डो को तबाह करने के तरीके ढूंढता रहेगा और ईरान यूरेनियम बनाता रहेगा.





