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गरियाबंद में भारी बारिश का असर! सिकासार जलाशय 89% भरा, 12 गेट खुले; 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा

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गरियाबंद – जिले और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक तेज हो गई है। सिकासार जलाशय का जलस्तर बढ़कर 89.32 प्रतिशत पहुंच गया है। बढ़ती आवक को देखते हुए जलाशय के 12 गेट 3 फीट तक खोल दिए गए हैं और करीब 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता एसके बर्मन के मुताबिक, 25 सितंबर 2026 की स्थिति में सिकासार जलाशय की कुल भंडारण क्षमता 198.82 मिलियन घन मीटर है, जबकि वर्तमान में इसमें 179.28 मिलियन घन मीटर पानी संग्रहित है। जलाशय का जलस्तर 1330.00 फीट दर्ज किया गया है।

34 हजार क्यूसेक पानी की आवक

सिकासार जलाशय में फिलहाल करीब 34,000 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है। बढ़ती आवक को देखते हुए जलाशय से लगभग 20,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके लिए 12 गेटों को 3 फीट तक खोला गया है।

गंगरेल 99%, मुरुमसिल्ली 100% भरा

क्षेत्र के दूसरे प्रमुख जलाशयों में भी जलभराव का स्तर काफी अधिक है। 25 सितंबर को सुबह 10 बजे की स्थिति के अनुसार—

– गंगरेल जलाशय: 99.01% जलभराव, करीब 1,22,000 क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा।
– मुरुमसिल्ली जलाशय: 100% जलभराव, करीब 7,558 क्यूसेक पानी गंगरेल की ओर छोड़ा जा रहा।
– दुधावा जलाशय: 97.36% जलभराव, करीब 16,762 क्यूसेक पानी गंगरेल/महानदी की ओर छोड़ा जा रहा।
– सोंढूर जलाशय: 89.42% जलभराव, करीब 42,570 क्यूसेक पानी पैरी/महानदी नदी तंत्र की ओर छोड़ा जा रहा।

इस तरह अलग-अलग जलाशयों से नदियों और नदी तंत्र में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे जलप्रवाह बढ़ा हुआ है।

प्रशासन ने जारी की सावधानी की अपील

जलाशयों में बढ़ते जलस्तर और नदियों में जारी जलप्रवाह को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने नागरिकों को नदियों, नालों, पुल-पुलियों और जलाशयों के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी है।

तेज बहाव वाले पानी में उतरने से बचने और बच्चों, बुजुर्गों तथा पशुओं को नदी-नालों और जलाशयों से दूर रखने को कहा गया है। निचले और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने जलभराव वाले क्षेत्रों में आवागमन के दौरान सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग अपनाने और पुल-पुलियों पर पानी होने की स्थिति में वाहन नहीं चलाने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल जिला प्रशासन या स्थानीय प्रशासन को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।