भुवनेश्वर – ओडिशा की स्वदेशी कोरापुट कॉफी को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है. नई दिल्ली में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों के लिए तैयार किट में इस कॉफी को शामिल किया गया है.
कोरापुट जिले की जैव-विविधता वाली आदिवासी पहाड़ियों में उगाई जाने वाली प्रीमियम सिंगल-ओरिजिन अरेबिका कॉफी ‘टाइगर ब्राइट’ को भारत के विभिन्न हिस्सों के अन्य क्षेत्रीय उत्पादों के साथ किट में शामिल किया गया है.
कोरापुट कॉफी की खेती आदिवासी किसानों द्वारा 920 मीटर की ऊंचाई पर की जाती है. यह पानी से धोकर तैयार की जाने वाली (washed-processed) कॉफी है, और इसे हल्के-मध्यम स्तर पर भुना जाता है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध बेहद खास हो जाता है.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्रालय के अनुरोध के बाद ओडिशा आदिवासी विकास सहकारी निगम लिमिटेड (TDCCOL) द्वारा ‘टाइगर ब्राइट’ ब्लेंड के 1,500 से अधिक पैकेट नई दिल्ली भेजे गए.
‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय उत्पादों को मिल रही पहचान
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, “पिछले कुछ दिनों से मैं वैश्विक मंचों पर ओडिशा के बारे में बात कर रहा हूं और दुनिया को हमारे राज्य में अवसरों, ताकत और क्षमता को देखने के लिए आमंत्रित कर रहा हूं. आज, यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि कोरापुट कॉफी BRICS इंडिया 2026 समिट में ओडिशा की कहानी का एक और पहलू पेश कर रही है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच को दिखाता है, जिससे हमारे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान और ताकत मिल रही है.”
उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह बेहद गर्व का बात है कि हमारे लोगों की कड़ी मेहनत और हमारी भूमि की समृद्धि को ओडिशा के बाहर मान्यता और पहचान मिल रही है. मैं दुनिया को ऐसा ही ओडिशा दिखाना चाहता हूं – जो अपनी मिट्टी से जुड़ा हो, अपनी पहचान पर गर्व करता हो और दुनिया के साथ अपनी कहानी साझा करने में आत्मविश्वास रखता हो.”
आदिवासी किसानों को होगा फायदा
कोरापुट कॉफी जिले के लक्ष्मीपुर, काशीपुर, दसमांतपुर, नंदापुर, लमतापुट, कोरापुट और पोटांगी जैसे इलाकों में उगाई जाती है. इस ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से इसकी मांग बढ़ेगी और आदिवासी किसानों को फायदा होगा.
कोरापुट के कलेक्टर मनोज सत्यवान महाजन ने कहा, “कोरापुट कॉफी सिर्फ एक उत्पाद नहीं है, बल्कि यह यहां की मिट्टी की विशेषता, इलाके के खास मौसम और कोरापुट जिले के आदिवासी किसानों की मेहनत को दिखाती है. हमारे लिए यह बहुत गर्व की बात है कि हम ब्रिक्स समिट में एक खास उत्पाद के तौर पर ओडिशा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.”
इस घटनाक्रम पर, कोरापुट के कॉफी उत्पादकों ने कहा कि BRICS से मिलने वाले इस अवसर से यह घरेलू ब्रांड बड़े मंचों तक और देश के बाहर भी पहुचेगा. कोरापुट जिले के पुंजीसिल गांव की एक कॉफी उत्पादक बिंद्या बडनायक ने कहा, “हम खुश हैं और हमें उम्मीद भी है कि ब्रिक्स किट में शामिल किए जाने से इस कॉफी ब्रांड को एक बड़ा बाजार मिलेगा. यह कॉफी न सिर्फ प्रतिनिधियों को एक अलग सुगंध और स्वाद देगी, बल्कि आदिवासी किसानों और उनकी उपज की कहानी भी बयां करेगी.”



