रायपुर – कहीं नीला पानी सुकून देता है,कहीं झरनों की खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है, तो कहीं डैम और जलाशयों के किनारे सेल्फी लेने का जुनून लोगों को मौत के मुहाने तक पहुंचा रहा है. जिस पानी के किनारे लोग बैठकर सुकून ढूंढते हैं, लापरवाही बरतने पर वहीं उनकी जिंदगी छीनने में पल भर की देरी नहीं करता. रायपुर संभाग में तालाब, नदी, डैम, वाटरफॉल और खदानों में डूबने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं. पिछले तीन साल में 118 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, जबकि SDRF ने 271 लोगों को रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई है.
खूबसूरती के पीछे छिपा खतरा
ये तस्वीरें जितनी खूबसूरत हैं, इनका दूसरा पहलू उतना ही डरावना है . जलाशय, एनीकट, नदी के घाट, झरने और खदानें, बारिश के मौसम में इन जगहों पर पानी का स्तर बढ़ जाता है और कई जगहों पर गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. इसके बावजूद लोग पानी के बेहद करीब पहुंचते हैं,सेल्फी लेते हैं, पिकनिक मनाते हैं, और कई बार तैरने के लिए गहरे पानी में उतर जाते हैं. एक छोटी सी चूक,और देखते ही देखते जिंदगी खतरे में पड़ जाती है.
रायपुर में 9 डेथ स्पॉट, फिर भी ब्लैक स्पॉट नहीं
रायपुर और आसपास ऐसे कई स्थान हैं, जहां डूबने की घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं.इनमें ब्लू वाटर एयरपोर्ट के पास, सात पाखर एनीकट मुजगहन, मुंद्रा एनीकट, सेजबहार एनीकट, उरला एनीकट, पसतराई घाट, बद्री घाट, महादेव घाट और खारुन नदी का महादेव घाट शामिल हैं. इन जगहों पर हादसों का सिलसिला सवाल खड़ा करता है,जब किसी स्थान पर बार-बार डूबने की घटनाएं हो रही हैं, तो क्या उसे चिन्हित कर स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने चाहिए.
सबसे खतरनाक बना ब्लू वाटर
रायपुर एयरपोर्ट के पास स्थित ब्लू वाटर इन दिनों खूबसूरती के साथ-साथ जानलेवा खतरे के लिए भी पहचान बनाता जा रहा है. करीब 400 फीट गहरे इस गड्ढे में अब तक 10 से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है. दूर से देखने पर इसका नीला पानी किसी खूबसूरत समुद्र का एहसास कराता है, लेकिन इसी खूबसूरती के पीछे मौत का गहरा जाल छिपा है.
पानी की अत्यधिक गहराई के कारण यहां उतरना बेहद जोखिम भरा है और जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है. इसके बावजूद रोमांच, सेल्फी और वीडियो बनाने के लिए लोग यहां पहुंच रहे हैं.सबसे चिंता की बात यह है कि खतरे को जानते हुए भी लोग पानी के करीब जाने से बाज नहीं आ रहे हैं. ऐसे में ब्लू वाटर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी वक्त एक और बड़े हादसे की वजह बन सकती है.ेetv से साभार
डराने वाला आंकड़ा
साल 2023- 30 की मौत
साल 2025 – 32 की मौत
साल 2026 – 19 की मौत (अगस्त तक)
तीन सालों में 118 जिंदगियां पानी में समा चुकी हैं.
ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों की कहानी हैं, जिन्होंने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया.



