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‘महंगे हुए गणपति’, महंगाई के चलते मूर्तियों की कीमतों में इजाफा, 15 से 20 फीसदी तक चढ़े दाम

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कोरबा – हिंदू धर्म में गणपति महाराज को प्रथम पूज्य देवता माना गया है. मान्यता है कि विघ्नहर्ता की पूजा सभी कार्य निर्विघ्न पूरे होते हैं. अत: पूजा और शुभ कार्य के पहले गणपति महाराज की वंदना की जाती है. गणपति पूजा की शुरुआत 14 सितंबर गणेश चतुर्थी पर्व से होगी. कोरबा में हर साल धूमधाम के साथ गणपति पूजा का उत्सव मनाया जाता है. इस साल भी अलग-अलग पूजा समितियां पूजा की तैयारियों में जुट गई है.

‘महंगे हुए गणपति’

बीते कई महीनों से मूर्तिकार भगवान गणपति की मूर्तियों के निर्माण में दिन रात जुटे हुए हैं. मूर्तियों को आकार देने का काम तेजी से जारी है. गणेश उत्सव समितियों के द्वारा मूर्तियों की बुकिंग भी शुरू कर दी है, इस वर्ष गणेशोत्सव समितियों और आम नागरिकों को लंबोदर की प्रतिमा खरीदने के लिए अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है.

दरअसल, ​कच्चे माल की कीमतों में उछाल और बढ़ती लागत का सीधा असर इस बार गणेश प्रतिमाओं के निर्माण पर पड़ रहा है. मूर्तिकारों के अनुसार, इस साल मिट्टी, रंग, विभिन्न सजावटी सामग्रियों और मजदूरी की लागत में खासी बढ़ोतरी हुई है. जिसके चलते गणेश मूर्तियों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है.

सीतामणी है मूर्ति निर्माण का हब

शहर के सीतामणी को गणेश मूर्तियों के निर्माण का हब माना जाता है, यहां न सिर्फ लोकल बल्कि पश्चिम बंगाल से भी कारीगर भी आकर ठहरते हैं और गणपति जी की मूर्ति का निर्माण करते हैं. यहां ठहरे मूर्तिकार गणेश प्रतिमा के साथ ही आने वाले नवरात्रि और अन्य उत्सव के लिए भी वह मूर्तियों को आकार देने में लगे हुए हैं.

​एडवांस बुकिंग और विशेष प्रतिमाओं का क्रेज

​त्योहार को लेकर लोगों में पहले से ही तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. शहर की कई प्रमुख गणेश उत्सव समितियां इस बार प्रतिमा का विशेष आकार, मनमोहक रूप और भव्य सजावट तय करने के लिए लगातार मूर्तिकारों से संपर्क कर रही हैं. ​मांग और लागत को देखते हुए मूर्तिकारों द्वारा बड़े आकार और विशेष रूप से सजाई जाने वाली आदमकद मूर्तियों की अग्रिम बुकिंग शुरू कर दी गई है. इसके तहत कुछ विशेष और बड़ी मूर्तियों के लिए कुल कीमत का 30 प्रतिशत तक एडवांस लिया जा रहा है, ताकि बुकिंग सुरक्षित रहे.

त्योहार को लेकर बाजार में उत्साह

​कोरबा शहर के विभिन्न इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी मूर्तिकार दिन-रात मूर्तियां गढ़ने में जुटे हुए हैं, समितियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा अभी से मूर्तिकारों के पास पहुंचकर मूर्तियों के डिजाइन और मूल्य की जानकारी ली जा रही है. प्रतिमा तैयार करने में केवल मिट्टी ही नहीं, बल्कि बांस, रस्सी, कपड़ा, रंग, पेंट, सजावटी सामान और अन्य सामग्री की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा प्रतिमा तैयार करने वाले कारीगरों की मजदूरी भी बढ़ी है. इन सभी खर्चों का सीधा असर मूर्तियों की लागत पर पड़ रहा है.

25 से अधिक मूर्तिकार दिन रात कर रहे काम

शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 25 से अधिक मूर्तिकार गणेश प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं. कुछ मूर्तिकारों ने बड़े आकार की प्रतिमाओं पर काम शुरू कर दिया है, जबकि कई छोटे और मध्यम आकार की प्रतिमाओं को तैयार करने में लगे हैं.

प्लास्टर ऑफ पेरिस और एआई जनरेटेड डिज़ाइन वाले मूर्तियों से दूरी

इस बार मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है, प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने की अपील की जाती रही है. एआई जनरेटेड डिजाइन से उटपटांग प्रतिमाओं का निर्माण पर भी इस वर्ष रोक है, ग्राहक से लेकर मूर्तिकार तक यह बात कह रहे हैं. गणेश उत्सव समिति के पदाधिकारी भी परंपरागत आध्यात्मिक तौर पर बनाए जाने वाले गणेश प्रतिमाओं की मांग कर रहे हैं और इसी तरह की गणेश प्रतिमा का निर्माण भी किया जा रहा है.

पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार पहुंचे कोरबा

पश्चिम बंगाल मूर्तिकार बनेसिक कहते हैं, ”मूर्तियों को बनाना आसान नहीं रह गया है. काफी मेहनत लगती है, पहले मिट्टी और पैरावट से स्ट्रक्चर तैयार करना पड़ता है. जिसके बाद रंग भरने का काम करते हैं, काफी मेहनत लगती है. लोग आ रहे हैं और अपनी मूर्तियों की बुकिंग भी करवा रहे हैं. इस वर्ष मिट्टी के गणेश का निर्माण हम कर रहे हैं, प्लास्टर पेरिस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.”