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लोकसभा – पीएम मोदी कैमरे का नहीं दिल का एंगल बदलें, पेपर लीक चर्चा पर बोलीं प्रियंका गांधी

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संसद के मानसून सत्र का आज सातवां दिन है। लोकसभा में परीक्षा में सुधारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया गया है। स्पीकर ओम बिरला ने जरूरत पड़ने पर इससे अधिक समय देने की बात कही है।

पीएम मोदी कैमरे का नहीं दिल का एंगल बदलें- प्रियंका गांधी

लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन आज जिस संशोधन पर चर्चा कर रहा है, वह उसी कानून में बदलाव है जिसे वर्ष 2024 में पारित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि कानून बनने के बाद भी अब तक पेपर लीक के किसी आरोपी को सजा नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से छात्रों के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों की पहचान सामने नहीं लाई जा रही। प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने सलाहकार बदलने चाहिए, क्योंकि केवल नई समितियां बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने राधाकृष्णन समिति का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया, जिनका शिक्षा से कोई संबंध नहीं है। इस दौरान उनकी टिप्पणी पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुस्कुराए तो प्रियंका गांधी ने कहा, “सर, आप मुस्कुराइए जरूर।”

उन्होंने फास्ट ट्रैक अदालतों के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई के वकील पिछली सुनवाई में अदालत तक नहीं पहुंचे। प्रियंका गांधी ने कहा कि केवल अलग-अलग कैमरा एंगल से वीडियो बनाकर नई पीढ़ी को प्रभावित नहीं किया जा सकता, बल्कि प्रधानमंत्री को अपने दिल का एंगल बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पुलिस की लाठी केवल छात्रों की पीठ पर नहीं, बल्कि सरकार की साख पर भी पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में चुनाव में वोट, राम मंदिर में चढ़ावे, किसानों की जमीन और सबसे बढ़कर देश के युवाओं के भविष्य की चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष भारत के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार है। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने टिप्पणी की कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी के भाषण की नकल की है।

हंगामे के बीच स्पीकर ने विधेयक तक सीमित रहने को कहा

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने प्रियंका गांधी के बयान पर कड़ा विरोध जताते हुए उसके प्रमाण की मांग की। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और प्रल्हाद जोशी ने कहा कि आरोपों की पुष्टि किए बिना चर्चा आगे नहीं बढ़नी चाहिए। इस पर कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि इसी सदन में पहले निशिकांत दुबे ने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी पर भी टिप्पणियां की थीं, जिन्हें रिकॉर्ड से नहीं हटाया गया था। जवाब में निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने उस समय अपने बयानों के प्रमाण दिए थे और आज भी उन पर कायम हैं। प्रल्हाद जोशी ने आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई की मांग की। वहीं, प्रियंका गांधी ने सदन की मेज पर अखबार की कटिंग रखते हुए पूछा कि क्या जोशी अपने बयान से इनकार कर रहे हैं। बढ़ते हंगामे के बीच स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन की चर्चा केवल विधेयक तक सीमित रहेगी।

प्रियंका गांधी के किस बयान पर हुआ हंगामा?

प्रधानमंत्री ने नया शिक्षा मंत्री चुना, एक ऐसे व्यक्ति को चुना, जिसने एक गर्भवती रेप पीड़िता के दोषियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की। इस पर स्पीकर ने उनको टोका और सत्तापक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि प्रियंका गांधी ने जो कहा, हमारे नए शिक्षा मंत्री पर जो टिप्पणी की, वह चरित्र हनन है एक तरीके से। हम उम्मीद नहीं करते ऐसी बातों की। इसे रिकॉर्ड से हटाया जाए। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल ना करें। संसद में डिबेट के स्तर को ना गिराएं। जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। यह मानता हूं कि ऑथेंटिकेट नहीं कर सकती हैं तो माफी मांगनी चाहिए। हालांकि इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि वो इसका प्रमाण उपलब्ध कर देंगी।

‘पैलट गन चलाने के लिए किसने आदेश दिया’, सदन में बोलीं प्रियंका गांधी

लोकसभा में प्रियंका ने कहा कि कुछ दिनों पहले हम राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए थे। पुलिस लाठी चार्ज में घायल हुई छात्रा का हाल जानने। मैं सरकार से पूछना चाहती हूं कि क्या जरूरत थी लड़कियों पर दमन करने की। क्या जरूरत थी उनपर पैलट गन चलाने की। उनपर एक-47 चलाने की। छात्र तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थें। उन्होंने आगे कहा कि सरकार देश के नौजवानों से क्यों डरती है। अभी तक एक भी माफिया को सजा नहीं हुई। शिक्षातंत्र में आरएसएस प्रचारकों को भर लिया गया।

प्रियंका गांधी ने संसद में सरकार पर तीखा हमला करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि हम बार-बार सवाल कर रहे हैं कि इस कार्रवाई की अनुमति किसने दी और क्या यह आदेश प्रधानमंत्री या गृह मंत्री की ओर से आया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के छात्र, उनके माता-पिता और शिक्षक इस मामले में जवाब चाहते हैं। संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक जवाबदेही का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं, शासक नहीं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल किया। ऐसे में उन्हें न्याय, पारदर्शिता और सम्मान मिलना चाहिए।

जेन जी प्रदर्शन पर कंगना रनौत की टिप्पणी से विवाद, कांग्रेस ने भी साधा निशाना

जपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में हुए हालिया छात्र आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों पर सोशल मीडिया के जरिए तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं को जेनरेशन गटर बताते हुए उनके वीडियो को घिन पैदा करने वाला कहा। कंगना ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और भाषा की आलोचना करते हुए कई विवादित टिप्पणियां कीं। मंगलवार को एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं और दूसरों के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं, उन्हें प्रतिक्रिया के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने न्यूटन के तीसरे नियम का हवाला देते हुए अपनी बात रखी। कंगना की टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस नेताओं रेणुका चौधरी और इमरान प्रतापगढ़ी ने उनकी भाषा की आलोचना की। वहीं, कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी कंगना की टिप्पणियों को आपत्तिजनक और दोहरा मापदंड अपनाने वाला बताया।

‘पेपर लीक नहीं सरकार की नाकामी समस्या है’, लोकसभा में बोले सांसद अभिषेक बनर्जी

टीएमसी नेता और सासंद अभिषेक बनर्जी ने सरकार को सदन में घेरा। इस दौरान उन्होनें कई सावल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि ठीक से बहस हो, सदन चले। ये सरकार एक परीक्षा भी ठीक से नहीं करा सकती। जब छात्रों ने आवाज उठाई तो उन्हें लाठियां मिली। उन्होंने आगे कहा कि न्यू इंडिया में यंग इंडिया कहां है। पेपर लीक नहीं सरकार की नाकामी समस्या है। भाजपा सरकार को याद रखना चाहिए। कि हर जेनरेशन आपका रिपोर्ट कार्ड बनाती है। इस जेनरेशन के रिपोर्ट कार्ड में सरकार फेल है। फेल है सही तरीके से परीक्षा कराने में। फेल है इनको न्याय देने में। फेल इनका भरोसा जीतने में। अब सरकार कह रही है कि हम कड़े कानून लेकर आए हैं। लेकिन किसके लिए? अपराधियाों के लिए, सिंडिकेट के लिए? लेकिन अफसरों के लिए क्या? उनके मंत्रियों के लिए क्या? जिम्मेदारी कौन लेगा? जो परीक्षा कराने में नाकाम है।

अभी दो दिन पहले पीएम मोदी का वीडियो आया। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की चर्चा की। सरकार ने लोगों से कहा कि ये संशोधन इसलिए किया गया कि जल्दी मामलों में सुनवाई है। उन्होंने आगे कहा कि कल की ही बात है एक अदालत के स्पेशल जज ने सुनवाई नहीं की। सिर्फ इसलिए क्योंकि सीबीआई की ओर से कोई नहीं आया। टीवी पर सरकार कहती है कि ये फास्ट ट्रैक कोर्ट बना रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि सरकार समय से अपने कर्मचारियों को भी कोर्ट नहीं भेज पा रही है।

लोकसभा में अखिलेश यादव बोले- प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के खिलाफ नारा लगा कि सरकार को ये अहंकार था कि ये सरकार झुकती नहीं है। लेकिन नौजवानों ये नारा दिया कि झुकाने वाला चाहिए। सरकार भी झुकती है। सरकार झुकी और स्वीकार किया उसने जो करोड़ों नौजवान मांग कर रहे थे। सदन में उन आश्वासनों को सरकार क्यों नहीं रख रही है। जिनपर सहमति बनी है। हम लोगों ने जब मंत्री जी लौटे, जब वो मंत्री नहीं रहे, उनका स्वागत हुआ। हमें स्वागत से परेशानी नहीं है। लेकिन सभी सदस्यों को कितनी राहत मिली होगी कि एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। ये सरकार नकारात्मक राजनीति करती थी।

भाजपा वचन नहीं जुमला देती है। मुझे उम्मीद है सभी युवा नौजवानों की सभी मांगे सरकार स्वीकार करेगी। सरकार ये भी स्वीकार करेगी कि जो पार्टी चीज मजाक में बनी, वो कितनी सीरियस हो गई। इतनी सीरयस हो गई सरकार कि वो लोकतांत्रिक गई। जो उनको धरने पर बैठे दिया। हमने वो भी समय देखा है, जहां लोगों को धरने पर बैठने नहीं दिया। वर्षों तक लोगों धरने पर बैठे रहे, उनकी सुनी नहीं गई। इसी दिल्ली को किसानों ने घेरा था। जब सरकार को लगा कि चुनाव आने वाले हैं, तो सरकार ने तीनों काले कानून वापस ले लिया। जब ये सरकार डर जाती है। घबरा जाती है। उसके बाद सरकार झुक जाती है।  इसीलिए ये नारा बढ़िया है कि झुकती है सरकार बस झुकाने वाला चाहिए।

पेपर लीक रोकने के लिए यह समय की मांग: बांसुरी स्वराज

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह विधेयक न केवल जरूरी है, बल्कि आज के समय की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि देश में परीक्षा माफिया अब संगठित रूप ले चुका है और यह कानून उससे प्रभावी ढंग से निपटने का रास्ता तैयार करता है। इस विधेयक को लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक एक घोर अपराध है और यह केवल बयान नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट मंशा है। इसी उद्देश्य से यह विधेयक संसद में लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने का प्रयास करता है। इसके तहत केंद्र सरकार को विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जबकि ट्रायल तीन महीने में पूरा कर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है।

खुद को वकील बताते हुए बांसुरी स्वराज ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़कर उन्हें प्रेरित किया है। उनका प्रयास रहा है कि देश के विद्यार्थी ‘एग्जाम वॉरियर’ बनें, न कि ‘एग्जाम वॉरियर’ बनने से पहले परीक्षा के दबाव में टूटें। भाजपा सांसद ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान आईआईटी और मेडिकल संस्थानों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के नामांकन में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय के दायरे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

गोगोई बोले- लड़कियों पर अत्याचार, पैलेट गन का इस्तेमाल…

गौरव गोगोई ने कहा कि छात्र आंदोलन ने यह दिखा दिया कि लोगों के मन से डर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की रात 10 बजे भी लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और लोकतंत्र के समर्थन में खड़े रहे। उन्होंने कहा कि खून से लथपथ चेहरा होने के बावजूद एक छात्र पुलिस के सामने डटा रहा और लोगों को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराया।

उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के दौरान कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि उन भावनाओं को भी याद रखना चाहिए, जिन्हें छात्रों ने सामने रखा। इस दौरान उन्होंने शायर वसीम बरेलवी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा, “उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।” गोगोई ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक युवक ने आगे आकर एक लड़की को बचाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि एक छात्र ने कहा था कि जिस उंगली से उसने कमल के निशान पर वोट दिया था, उसी उंगली को आज पुलिस ने तोड़ दिया।

उन्होंने देशभर के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के लिए स्विगी के माध्यम से भोजन भेजा और वकीलों ने भी लोकतंत्र के समर्थन में उनका साथ दिया। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, एक पुलिसकर्मी ने एक लड़की को थप्पड़ मारा और एक बच्ची के निजी अंग पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं जाएगा और इस पूरे मामले में गृह मंत्री से जवाब मांगा। गौरव गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक इसलिए लेकर आई है क्योंकि उसकी पुलिस छात्र आंदोलन को दबाने में सफल नहीं हो सकी। उन्होंने बिहार में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा एके-47 के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।

गोगोई ने कहा- प्रधान सिर्फ एक मुखौटा

कांग्रेस सांसद ने कहा कि आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम है। आप चाहते हैं कि शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोग आपके संगठन के सदस्य बने। डीयू, IIT, जेएनयू ने अपने स्टूडेंट्स ने कहा कि प्रदर्शन में मता जाओ। क्या ऐसे हम आने वाले भारत का निर्माण करेंगे। राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि प्रधान सिर्फ एक मुखौटा हैं। उनके हटने से भी शिक्षा में सुधार आएगा, इसका विश्वास न हमें है, न बच्चों को। बच्चे क्या करें। उनके पास पैसे नहीं है कि 30-30 लाख में पैसे खरीद सकें। वे नाराज हैं। जब वे लड़ नहीं पाते तो आत्महत्या कर लेतें हैं।