रायपुर – छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव करीब 14 घंटे की बहस के बाद गिर गया। शासन, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार 14 घंटे तक चर्चा चली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष के सभी सवालों के जवाब दिए। इस दौरान सीएम साय का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्होंने कांग्रेस में कई तीखे हमले बोले जिस पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।
अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के साथ पांच दिवसीय मानसून सत्र का समापन भी हो गया। सत्ता पक्ष ने किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस के 136 सूत्री आरोपपत्र को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कुल 17 विधायकों ने चर्चा में भाग लिया जो शुक्रवार दोपहर बाद शुरू हुई और देर रात करीब ढाई बजे समाप्त हुई।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए
कांग्रेस ने 136 सूत्री ‘‘आरोपपत्र’’ पेश करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। चर्चा का जवाब देते हुए साय ने अविश्वास प्रस्ताव को ‘‘खोखला, निराधार और राजनीतिक नौटंकी’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि झूठ और भ्रष्टाचार में पीएचडी का कोई पाठ्यक्रम होता, तो कांग्रेस के सदस्य उसमें विशेषज्ञ होते।
छत्तीसगढ़वासियों के खिलाफ आया है अविश्वास प्रस्ताव
सीएम साय ने सवाल किया कि क्या यह प्रस्ताव उन तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के खिलाफ है, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता सौंपी और बाद में लोकसभा तथा स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘‘शायद वे यह पचा नहीं पा रहे हैं कि एक गांव के आदिवासी किसान का बेटा आज मुख्यमंत्री है।’’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि ‘‘राजा’’ (भूपेश बघेल) और ‘‘महाराजा’’ (टीएस सिंह देव) के बीच नेतृत्व को लेकर चली खींचतान और आपसी गुटबाजी से राज्य का शासन प्रभावित हुआ। साय ने कहा कि उनकी सरकार की कथनी और करनी में समानता है। उन्होंने 25 लाख किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, लंबित बोनस के रूप में 3,716 करोड़ रुपये के भुगतान, सिंचाई क्षमता दोगुनी करने तथा 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया।
भूपेश बघेल ने कहा- अदृश्य शक्ति चला रही है राज्य
उन्होंने बस्तर से माओवादियों को पूरी तरह हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राज्य सुरक्षा बलों को श्रेय दिया। प्रस्ताव का समर्थन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य को एक ‘‘अदृश्य शक्ति’’ चला रही है। उन्होंने दिसंबर 2023 में भाजपा के सत्ता संभालने से कुछ दिन पहले हसदेव वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया।
- उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों का किया खंडन
- कहा- घोटालों में फंसी रही भूपेश बघेल की सरकार
- अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
- विधानसभा का शीतकालीन सत्र दिसंबर में शुरू हो सकता है
भू माफिया एक्टिव हो गए
उन्होंने आरोप लगाया कि रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा के बीच उद्योगों के लिए वन भूमि खाली कराई गई। उन्होंने दावा किया कि जहां नक्सलवाद कम हुआ है, वहीं अब ‘‘भू-माफिया’’ बस्तर की खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं। बघेल ने कहा, ‘‘नक्सली भले ही चले गए हों, लेकिन भू-माफिया आ गए हैं। इसलिए बस्तर के लोग चिंतित हैं।’’






