अक्सर ही ऐसा कहा जाता है कि मरने के बाद लोगों को यमराज दिखते हैं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.
विज्ञान और धर्म दोनों ही इस बात की अलग-अलग जानकारी देते हैं कि इंसान के आखिरी पलों में क्या होता है. जहां मेडिकल एक्सपर्ट्स शरीर के काम करना बंद करने के दौरान होने वाले बायोलॉजिकल बदलाव के बारे में बताते हैं वहीं धार्मिक परंपराओं का ऐसा मानना है कि आत्मा इस दुनिया से पहले अपनी यात्रा शुरू कर देती है. सबसे आम सवालों में से एक यह है कि क्या लोग सच में मरने से पहले यमराज को देखते हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
मरने से पहले शरीर में क्या होता है?
मेडिकल साइंस मरने की प्रक्रिया को दो चरण में बांटता है. एक है क्लिनिकल डेथ और एक है बायोलॉजिकल डेथ. आखिरी कुछ मिनट में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने की वजह से शरीर के जरूरी अंग काम करना बंद कर देते हैं.
सांस लेना धीमा हो जाता है
जैसे-जैसे मौत करीब आती है फेफड़े धीरे-धीरे सामान्य रूप से काम करने की क्षमता को खो देते हैं. सांस लेना उथला, धीमा और अनियमित हो जाता है. डॉ अक्सर इस चरण में निकलने वाली खास आवाज को डेथ रैटल कहते हैं.
दिल की धड़कन धीरे-धीरे रुक जाती है
दिल धीरे-धीरे पंप करना शुरू करता है और आखिरकार पूरी तरह से रुक जाता है. एक बार जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो पूरे शरीर में खून का बहना रुक जाता है. इससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती.
दिमाग का सक्रिय रहना
दिल के रुकने के बाद भी दिमाग कुछ मिनट तक काम करता रहता है. इस दौरान ऑक्सीजन की कमी से एंडोर्फिन जैसे केमिकल निकलते हैं. साथ ही कुछ वैज्ञानिक थ्योरी के मुताबिक डीएमटी जैसे कंपाउंड भी निकलते हैं जो हमारी सोच समझ या फिर अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं.
मतिभ्रम और जीवन की यादें
वैज्ञानिक का ऐसा मानना है कि इन केमिकल बदलावों की वजह से साफ-साफ मति भ्रम हो सकते हैं. मौत के करीब पहुंचने का अनुभव करने वाले कई लोग बताते हैं कि उन्होंने तेज रोशनी, सुरंग या फिर अपनी जिंदगी की जरूरी यादें देखीं.
सुनने की शक्ति सबसे आखिर में खत्म होती है
मेडिकल ऑब्जरवेशन से यह पता चलता है कि जब दिमाग काम करना बंद कर देता है तो सबसे आखिर में सुनने की शक्ति काम करना बंद करती है. आमतौर पर बोलने और देखने की क्षमता सबसे पहले खत्म होती है.
क्या कहता है गरुड़ पुराण?
गरुड़ पुराण में बताई गई हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जीवन के आखिरी पलों में ऐसी अध्यात्मिक घटनाएं होती हैं जिन्हें साफ विज्ञान से नहीं समझा जा सकता. धर्म ग्रंथ के मुताबिक मरने वाले व्यक्ति के सामने यमराज के दूत प्रकट होते हैं. माना जाता है कि नेक जीवन जीने वाले लोगों को यमदूत शांत और दयालु रूप में दिखाई देते हैं और पाप करने वाले लोगों को वे डरावने रूप में दिख सकते हैं.
इसी के साथ धार्मिक ग्रंथो में जीवन के आखिरी पलों में इंद्रियों के धीरे-धीरे शांत होने के बात भी लिखी है. भले ही इंसान के आसपास मौजूद अपनों का एहसास हो लेकिन वह बातचीत नहीं कर पाता.






