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रायपुर – सालेम स्कूल धर्मांतरण विवाद; नितिन बोले- विद्या के मंदिर को नहीं बनने देंगे राजनीति का अखाड़ा

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रायपुर – राजधानी रायपुर स्थित सालेम इंग्लिश स्कूल में धर्मांतरण को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। इस मामले में छत्तीसगढ़ डायसिस ऑफ बोर्ड एजुकेशन के वाइस प्रेसिडेंट नितिन लॉरेंस का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ हर हाल में खिलवाड़ नहीं होने देंगे। इस विद्या के मंदिर को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे।

बच्चों के शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। यदि ऐसा कुछ हुआ, तो मैनेजमेंट अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा । पिछले एक साल से उन्हें कहा जा रहा था कि आप ड्यूटी ज्वाइन करो। पढ़ाई का वातावरण बनाएं, उसे खराब ना करें। बच्चों के करियर के साथ खिलवाड़ न करें पर वह इन बातों को मानने से बाज नहीं आ रहे हैं। नए सत्र में यदि इस तरह से लापरवाही बरती जाएगी, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे हो पाएगी। पढ़ाई के दौरान आंदोलन करेंगे, तो कैसे पढ़ाई होगी? रही बात धर्मांतरण की तो संस्थान में धर्मांतरण जैसी कोई बात नहीं है । यदि उन्हें टर्मिनेट को लेकर कोई दिक्कत है, तो वह कोर्ट की शरण ले सकते हैं।

‘पुलिस की आड़ में कर रहे राजनीति’
उन्होंने इस मामले में कहा कि पुलिस को निशाना बनाया जा रहा है। मामले में जो भी तथ्य होंगे, पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी। पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई की है। रही बात जमानत की तो उसे लेना हमारा अधिकार है। यह बात समझ से परे है कि बजरंग दल इस मामले में क्यों प्रदर्शन कर रहा है? बजरंग दल को यह भी समझना चाहिए कि जो शिक्षक आरोपी हैं, जिन पर कार्रवाई हुई है, वह पहले पढ़ाने क्यों नहीं आ रहे थे? आखिर बच्चों के भविष्य के साथ कब तक खिलवाड़ किया जाएगा?

‘जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश’
लॉरेंस ने कहा कि ऐसे शिक्षकों को लेकर एक जांच कमेटी भी गठित कई गई है। उन्हें कई बार नोटिस भी दिया जा चुका है। लेकिन वह पुलिस की आड़ लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। पूर्व में पैसे को लेकर जो अनियमितता बरती गई है। उस पर से जांच से ध्यान भटकाने के लिए प्रदर्शन किया जा रहा है। स्कूल में सभी धर्म के बच्चे और शिक्षक हैं।  इस पर सभी शिक्षकों के हस्ताक्षर भी हैं। सभी धर्म का सम्मान किया जाता है। किसी भी धर्म के खिलाफ कार्य नहीं किया जाता है। आखिर 40 साल से किसी ने आवाज क्यों नहीं उठाया? कुल मिलाकर एक विचारधारा को दबाने के लिए इस तरह के प्रदर्शन किये जा रहे हैं। हम संस्था में बेहतर कार्य करना चाह रहे हैं। इस कार्य में बाधा पहुंचाने के लिए कौड़ियों की तरह कार्य कर रहे हैं। पढ़ाई की जगह नेतागिरी कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, तो एक नहीं दस धरना प्रदर्शन करें पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया करने देंगे। अरुण पन्नालाल के बहकावे में आकर कुछ बजरंग दल के लोग यह कार्य कर रहे हैं पर छात्रों के हित के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे।


जांच को छुपाने के लिए इस तरह की घटिया राजनीति: रूपिका लॉरेंस
दूसरी ओर सालेम इंग्लिश स्कूल की प्रभारी प्राचार्य रूपिका लॉरेंस ने कहा कि आरोप लगाने वालों का कहना कि वह 30-40 वर्ष से यहां पर नौकरी कर रहे हैं जबकि मैं यहां पर नवंबर 2023 से कार्यरत हूं। पिछले तीन साल में तो इन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा और जब डायसिस का चुनाव हो गया और हमारी गवर्निंग बॉडी गठित हो गई तब बड़ी जांच को छुपाने के लिए इस तरह की I घटिया राजनीति का सहारा लिया जा रहा है। आप जब भी हमारे चर्च में आएंगे तो वहां पर लोग लाइन लगाकर खड़े रहते हैं मेंबरशिप के लिए। मेंबरशिप लेने के लिए लोग तीन साल तक वेट करते हैं। बहुत मुश्किल से मेंबरशिप मिल पाती है। जो लोग स्कूल नहीं आ रहे हैं और एक जगह पर बैठे हुए हैं तो यह कोड ऑफ कंडक्ट में आता है। आप कोई भी गलत बयान नहीं दे सकते क्योंकि संस्था में केवल बड़े लोग ही काम नहीं कर रहे हैं छोटे व्यक्ति भी काम कर रहे हैं। कोड आफ कंडक्ट के तहत इन पर कार्रवाई की जाएगी।अमर उजाला से साभार