05 किमी तक शिकारियो, लकड़ी तस्करो व आगजनी की घटना पर सटीक नजर रखी जायेगी
गरियाबंद – उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व क्षेत्र में एडवांस तकनीक वाले थर्मल ड्रोन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जो कि अब पूरी हो गई है फिलहाल रिजर्व क्षेत्र को यूएसटीआर को एक थर्मल ड्रोन मिला है और भविष्य में आवश्यकतानुसार और ड्रोन की व्यवस्था की जाएगी। मिली जानकारी के अनुसार उक्त ड्रोन उन्नत तकनीक से भरपूर है ड्रोन मिलने से वन्य क्षेत्र में आगजनी की सही स्थिति का पता चल पाएगा साथ ही वन्य क्षेत्रो में वन्य जीवो के हीट को थर्मल ड्रोन सेंसर कर पाएगा जिससे वन्य जीवो के मूहमेंट की सही जानकारी मिल पाएगी। थर्मल ड्रोन को एक बैटरी से लगभग 40 मिनट तक उड़ाया जा सकता है। 05 किमी तक ड्रोन की रेंज है और उक्त ड्रोन से 500 मीटर दूर तक क्लीयर जूम इन की सुविधा इससे काफी दूर से क्लीयर फोटो, वीडियो लिये जा सकते है। इससे तस्करी व संदिग्ध गतिविधियां कैमरे में कैद हो जाएगी। उक्त ड्रोन में लेजर फाइंडर भी है। जो हर एक हाथी की प्रोफाईल जैसे जेंडर, हाइट, बिल्ट भी कर पाएगी। यह ड्रोन उन्नत डीजीपीएस तकनीक का प्लांट मैपिंग भी कर सकता है। जैसे 100 हेक्टयर भूमि की मैपिंग एक ही उड़ान से पूरी कर ली जाएगी। इससे क्षेत्र में कितने पेड़, गड्ढे आदि है, क्लीयर हो पाएगा। उक्त ड्रोन को चलाने आज से ट्रेनिंग शुरु की गई है।
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन ने बताया
–
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के वन संरक्षण प्रयासों को थर्मल, नाइट विजन, लेजर रेंज फाइंडर और डीजीपीएस पे-लोड से लैस यूएवी के शामिल होने से मजबूती मिली है। यह यूएवी ओडिशा सीमा पर तैनात किया जाएगा, जो शिकारियों और तस्करों की घुसपैठ और वन अग्नि घटनाओ का शीघ्र पता लगाने के लिए जानी जाती है। यह यूएवी थर्मल सिग्नेचर का पता लगाने और लकड़ी, मछली तस्करों और शिकारियों के जियो-टैग किए गए वीडियो बनाने की क्षमता रखता है (500 मीटर से स्पष्ट जूम के साथ)। ड्रोन की रेंज 05 किलोमीटर है।
इन वीडियो का उपयोग माननीय न्यायालयों में प्राथमिक साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है। यूएवी में वन्यजीवों का पता लगाने की सुविधा भी है, जिसका उपयोग रेस्क्यू ऑपरेशन में (बिना वन्यप्राणी को परेशान किये सुरक्षित दूरी से ) किया जा सकता है। बिना परमिट के टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में प्रवेश करना गैर-जमानती अपराध है, जिसके लिए न्यूनतम 3 वर्ष की कैद की सजा हो सकती है। यूएवी में डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) मॉड्यूल लगा है, जो वानिकी कार्यों – वृक्षारोपण, घास के मैदान, अतिक्रमण आदि – का सेंटीमीटर स्तर की सटीकता के साथ सटीक डिजिटल मानचित्रण करता है। यूएसटीआर के पास स्वयं का ड्रोन मैपिंग पोर्टल है, जिसके माध्यम से वानिकी कार्यों को आम जनता को प्रदर्शित किया जाता है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया जा सके।






