शराब घोटाले के मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद कांग्रेस नेता कवासी लखमा सुप्रीम कोर्ट की शर्त के चलते उड़ीसा के मलकानगिरी में रहेंगे. सीमावर्ती इलाका और राजनीतिक प्रभाव इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है. बजट सत्र में शामिल होने के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति मांगी है
रायपुर – छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोप में लगभग एक साल तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय यह शर्त लगाई है कि कवासी लखमा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे.

मलकानगिरी को ही क्यों चुना कवासी लखमा ने?
कवासी लखमा बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता माने जाते हैं. वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं. लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनका प्रभाव पड़ोसी राज्य उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में भी है.
मलकानगिरी और कोंटा दोनों ही सीमावर्ती इलाके हैं और इनके बीच की दूरी मात्र 20 से 25 किलोमीटर है. नजदीकी क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक संपर्क बनाए रखना आसान होता है. माना जा रहा है कि इसी वजह से कवासी लखमा ने मलकानगिरी को अपना ठिकाना चुना है.






