Home छत्तीसगढ़ गरियाबंद जिले में वनों को आग से बचाने हेतु कार्यशाला का आयोजन

गरियाबंद जिले में वनों को आग से बचाने हेतु कार्यशाला का आयोजन

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गांवों एवं हाट-बाजारों में कला जत्था व दीवार लेखन से जन-जागरूकता

गरियाबंद– ग्रीष्मकाल के दौरान संभावित वनाग्नि की रोकथाम एवं वनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में वनों को आग से बचाने हेतु विशेष कार्यशाला एवं जन-जागरूकता अभियान का आयोजन वन विभाग द्वारा किया जा रहा है।

इस अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न गांवों एवं साप्ताहिक हाट-बाजारों में कला जत्था के माध्यम से नुक्कड़ नाटक, लोकगीत एवं संवादात्मक प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं, जिनके द्वारा आमजन को वनाग्नि से होने वाले दुष्परिणामों तथा उससे बचाव के उपायों की जानकारी सरल एवं प्रभावी ढंग से दी जा रही है।
साथ ही, दीवार लेखन के माध्यम से “वनों में आग न लगाएं”, “वन हमारी अमूल्य धरोहर हैं”, “बीड़ी-सिगरेट जलाकर न फेंकें” एवं “आग की सूचना तुरंत दें” जैसे संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी, गरियाबंद श्री ससीगानंदन (भा.व.से.)ने अपने वक्तव्य में कहा कि
“वनाग्नि से न केवल वन संपदा को अपूरणीय क्षति होती है, बल्कि जैव विविधता, वन्यप्राणी एवं ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित होती है। वनों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए जनसहयोग अत्यंत आवश्यक है। गांवों एवं हाट-बाजारों में कला जत्था एवं दीवार लेखन के माध्यम से आमजन को जागरूक कर हम वनाग्नि की घटनाओं में प्रभावी कमी ला सकते हैं।”

कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, ग्राम वन समितियों, वन सुरक्षा समितियों, लघुवनोपज संग्राहक, स्व-सहायता समूह एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। प्रतिभागियों को विशेष रूप से महुआ, तेंदूपत्ता एवं अन्य वनोपज संग्रहण के दौरान आग का प्रयोग न करने तथा किसी भी प्रकार की वनाग्नि की सूचना तत्काल निकटतम वन कार्यालय या वनकर्मी को देने की अपील की गई।

वन विभाग द्वारा बताया गया कि अग्नि मौसम के दौरान यह जन-जागरूकता अभियान जिले भर में निरंतर संचालित किया जाएगा, जिससे जनभागीदारी के माध्यम से वनों को आग से सुरक्षित रखा जा सके।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नागरिकों ने वनों की सुरक्षा एवं वनाग्नि रोकथाम हेतु सक्रिय सहयोग करने का संकल्प लिया।