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इजरायल-हमास सीजफायर डन, अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बारी, पुतिन ने नेतन्याहू को घुमाया फोन

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मास्को – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर इजरायल और हमास के बीच हुए सीजफायर के बाद दुनिया को एक और शुभ समाचार मिलने की संभावना दिखने लगी है. इससे पूरे मध्य पूर्व और अरब में शांति की राह मजबूत होने की संभावना है. दरअसल, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को फोन पर बातचीत की. इसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा में सीजफायर योजना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विचार-विमर्श किया. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में चल रहे संघर्षों जैसे- रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-हमास युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास तेज हुए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं ने सीरिया में स्थिरता लाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का राजनयिक समाधान तलाशने की संभावनाओं पर भी चर्चा की. इसके अलावा प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पुतिन को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं. गौरतलब है कि गाजा में चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए इस समय हमास और इजराइली प्रतिनिधियों के बीच संघर्ष विराम वार्ताएं फिर से शुरू हो गई हैं. यह संघर्ष सात अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा दक्षिणी इजराइल पर हमले के बाद भड़क उठा था.
ट्रंप की शांति योजना को मिला समर्थन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तुत शांति योजना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. इस योजना के तहत गाजा में बंदी बनाए गए इजराइली नागरिकों की रिहाई के बदले इजराइली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा जाएगा. हालांकि इस योजना के कुछ अहम बिंदुओं पर अब भी बातचीत जारी है. इसी बीच, ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है. अगस्त में अलास्का में ट्रंप और पुतिन के बीच एक मुलाकात हुई थी, जिसमें यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हुई थी. हालांकि, यूक्रेन और यूरोपीय देशों की अपील के बावजूद तत्काल संघर्ष विराम पर कोई सहमति नहीं बन सकी.
इसके अतिरिक्त परमाणु हथियारों की होड़ को सीमित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है. सोमवार को क्रेमलिन ने डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने रूस द्वारा 2010 के न्यू स्टार्ट परमाणु हथियार नियंत्रण संधि को एक साल और आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को अच्छा विचार बताया था. पुतिन ने हाल ही में अमेरिका से इस संधि को आगे बढ़ाने की अपील की थी और कहा था कि रूस इसके लिए तैयार है. ट्रंप की सहमति ने इस संधि के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं. इस बीच वैश्विक स्तर पर इन कूटनीतिक प्रयासों को इस रूप में देखा जा रहा है कि शांति बहाली की दिशा में अमेरिका, रूस और इजरायल जैसे बड़े देशों की भूमिका आने वाले समय में निर्णायक हो सकती है.