महासमुंद – जिले के पांच धान संग्रहण केंद्रों से 81,620 क्विंटल धान के गायब होने का मामला सामने आया है, जिससे सरकार को लगभग 25 करोड़ 30 लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब धान की खरीद के बाद राइस मिलरों द्वारा उठाव के पश्चात संग्रहण केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान की कमी पाई गई। यह धान सत्र 2024-25 में खरीदे गए 110 लाख क्विंटल से अधिक धान का हिस्सा था, जिसे महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली के संग्रहण केंद्रों में रखा गया था।
रखरखाव पर खर्च के बाद भी करोड़ों का नुकसान
जिला विपणन विभाग ने इन पांच संग्रहण केंद्रों में धान के रख-रखाव, कैप कवर, प्लास्टिक, भूसे और फर्टिलाइजर्स पर 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की थी। इसके बावजूद, धान के उठाव के बाद 81,620 क्विंटल धान गायब मिला, जिसकी अनुमानित कीमत 25 करोड़ 30 लाख रुपये बताई जा रही है। धान का रख-रखाव करने वाले संग्रहण केंद्र प्रभारियों ने इस भारी मात्रा में धान की कमी के पीछे गाय, चूहे, कीड़े-पतंगे, दीमक और खराब मौसम को कारण बताया है। अधिकारियों के लिए यह जवाब गले नहीं उतर रहा है।
जिला विपणन विभाग ने इन पांच संग्रहण केंद्रों में धान के रख-रखाव, कैप कवर, प्लास्टिक, भूसे और फर्टिलाइजर्स पर 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की थी। इसके बावजूद, धान के उठाव के बाद 81,620 क्विंटल धान गायब मिला, जिसकी अनुमानित कीमत 25 करोड़ 30 लाख रुपये बताई जा रही है। धान का रख-रखाव करने वाले संग्रहण केंद्र प्रभारियों ने इस भारी मात्रा में धान की कमी के पीछे गाय, चूहे, कीड़े-पतंगे, दीमक और खराब मौसम को कारण बताया है। अधिकारियों के लिए यह जवाब गले नहीं उतर रहा है।






