गुरुग्राम – नाबालिग बच्ची और उसके परिवार से जुड़े वीडियो को कथित तौर पर तोड़-मरोड़कर प्रसारित करने के मामले में आरोपी पत्रकार अजीत अंजुम को अदालत से झटका लगा है। गुरुग्राम की अदालत में उनकी ओर से व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए दी गई दोनों अर्ज़ियाँ वापस ले ली गईं। इसके बाद कोर्ट ने मामले को अभियोजन साक्ष्य के चरण में भेज दिया है।
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, अजीत अंजुम की ओर से उनके वकील भूपेंद्र प्रताप सिंह ने साफ कहा कि 19 अप्रैल 2025 और 25 अगस्त 2025 को दायर दोनों अर्ज़ियाँ अब वापस ली जा रही हैं। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए इन अर्ज़ियों को “वापस ली गई” मानकर खारिज कर दिया।
इस दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि फिलहाल इस केस में कोई और आवेदन लंबित नहीं है और अब मामले को आगे बढ़ाया जाए। आरोपी पक्ष ने इस पर कोई आपत्ति नहीं की।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आदेश दिया कि मामला अब 17 जनवरी 2026 को अभियोजन साक्ष्य के लिए सुना जाएगा। कोर्ट ने उस तारीख के लिए शिकायतकर्ता को समन जारी करने के भी निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला
शिकायत के अनुसार, एक नाबालिग बच्ची और उसके परिवार से जुड़े वीडियो को एडिट करके, संदर्भ से हटाकर और कथित तौर पर गलत तरीके से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाया गया। आरोप है कि आसाराम द्वारा दिए गए आशीर्वाद के वीडियो को इस तरह दिखाया गया जिससे बच्ची की गरिमा, निजता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचा।
कुल कितने आरोपी
जन जागरण मंच से जुड़े प्रतिनिधि हरिशंकर के अनुसार, इस मामले में कुल 8 आरोपी हैं। इनमें दीपक चौरसिया, चित्रा त्रिपाठी, सैयद सोहेल, अजीत अंजुम, अभिनव राज, सुनील दत्त, ललित बड़गुर्जर सहित अन्य नाम शामिल हैं।
पहले ही तय हो चुके हैं आरोप
अदालत इस मामले में पहले ही सभी आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में आरोप तय कर चुकी है। 25 अगस्त 2023 को आरोप तय होने के बाद अब मामला साक्ष्य के चरण में पहुंच चुका है।






