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धान खरीदी में अव्यवस्था, 74% धान पड़ा है केंद्रों में, किसान परेशान… क्या सरकार की मॉनिटरिंग हो गई फेल ?

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रायपुर – रायपुर के मंदिर हसौद और आरंग सहकारी बैंक शाखा के तहत आने वाले 14 धान खरीदी केंद्रों में से अधिकांश में धान का उठाव धीमी गति से हो रहा है। लगभग 2 लाख 25 हजार क्विंटल धान में से केवल 60 हजार क्विंटल धान का ही उठाव हुआ है, जबकि 1 लाख 65 हजार क्विंटल धान अभी भी परिवहन के लिए इंतजार कर रहा है। टेकारी धान खरीदी केंद्र में 18 हजार क्विंटल धान का उठाव नहीं हो पाया है, जबकि नारा धान खरीदी केंद्र में 25 हजार क्विंटल में से केवल 200 क्विंटल धान का ही उठाव हुआ है। किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रभावी परिवहन नहीं होने से कई केंद्रों में खरीदी व्यवस्था लड़खड़ाने की संभावना है और सोसायटियों को आर्थिक क्षति हो सकती है [किसान संघर्ष समिति की रिपोर्ट]।

धान उठाव की स्थिति

– टेकारी धान खरीदी केंद्र: 18 हजार क्विंटल धान का उठाव नहीं हुआ
– नारा धान खरीदी केंद्र: 25 हजार क्विंटल में से 200 क्विंटल धान का उठाव हुआ
– खौली केंद्र: 17 हजार क्विंटल में से 15 हजार क्विंटल धान का उठाव बाकी
– नगपुरा केंद्र: 20 हजार क्विंटल में से 12 हजार क्विंटल धान का उठाव बाकी
– चंदखुरी केंद्र: 10 हजार क्विंटल में से 7 हजार क्विंटल धान का उठाव बाकी

74% धान अब भी पड़ा, जिम्मेदार कौन?
सरकारी आंकड़े ही व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। प्रदेश के 33 जिलों में अब तक 47.33 लाख टन धान की खरीदी हो चुकी है, लेकिन इसमें से 34.23 लाख टन धान का उठाव अब तक नहीं हुआ। यानी करीब 74 प्रतिशत धान अभी भी उपार्जन केंद्रों में पड़ा है। सवाल यह है कि जब समय पर उठाव नहीं हो रहा था, तो खरीदी की रफ्तार बढ़ाने की योजना क्यों नहीं बनाई गई?

ड़कों पर उतरे किसान, चेतावनी या मजबूरी?
सुकमा जिले के गादीरास खरीदी केंद्र में किसानों का सब्र टूट गया। लिमिट बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने सुकमा-दंतेवाड़ा मुख्य सड़क जाम कर दी। किसानों का कहना है कि जहां पिछले साल दिसंबर तक 40 हजार क्विंटल धान खरीदा जा चुका था, वहीं इस बार महज 5 हजार क्विंटल खरीदी हुई है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं?

सरकार का दावा, लेकिन ज़मीनी हकीकत?
मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला का कहना है कि कलेक्टरों के प्रस्ताव के आधार पर लिमिट बढ़ाई जा रही है और मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब खरीदी की अंतिम तारीख 31 जनवरी 2026 तय है, तब क्या इतने कम समय में सभी किसानों का धान खरीदा जा सकेगा?किसान संगठनों का कहना है कि अगर तुरंत लिमिट और उठाव नहीं बढ़ाया गया, तो सरकार के दावे सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगे।

किसान संघर्ष समिति ने बताया कि पचेड़ा केंद्र की स्थिति सबसे अच्छी है, जहां 16 हजार क्विंटल धान में से केवल 1,500 क्विंटल धान का उठाव बाकी है।