नारायणपुर – छत्तीसगढ़ सरकार की नई नक्सल पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक बार फिर 28 माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं. बस्तर के नक्सल प्रभावित दंडकारण्य में एक्टिव माओवादियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर संविधान में अपनी आस्था जताई. सरेंडर करने वाले माओवादियों ने पुनर्वास से पुनर्जीवन (पूना मार्गेम) नीति में अपनी आस्था जताते हुए अपने हथियार भी पुलिस को सौंप दिए. सरेंडर करने वाले सभी माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DSZC) में सक्रिय रहे हैं.
28 माओवादियों ने किया सरेंडर
दंडकारण्य में आज विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच 28 वर्दीधारी नक्सली पुलिस के वाहन में सवार होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय नारायणपुर पहुंचे. बड़ी संख्या में माओवादियों के सरेंडर किए जाने की खबर को जिला प्रशासन ने काफी गोपनियता के साथ अंजाम तक पहुंचाया. माओवादियों को जिला मुख्यालय लाने के लिए भी भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया. जिन 28 सक्रिय माओवादियों ने सरेंडर किया वो दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य रहे हैं. सरेंडर करने वाले सभी माओवादी लंबे वक्त से हिंसक वारदातों में शामिल रहे हैं.
89 लाख के इनामी माओवादियों का सरेंडर
सरेंडर करने वालों में कुतुल एरिया कमेटी का खूंखार डीवीसी मेंबर दिनेश उर्फ पंडी भी शामिल है. दिनेश पर कुल 8 लाख का इनाम शासन की ओर से रखा गया था. जिन 28 माओवादियों ने आज सरेंडर किया में 19 महिला नक्सली और 9 पुरुष माओवादी शामिल हैं. सभी पर कुल 89 लाख का इनाम घोषित था. नक्सलियों ने पुलिस के सामने INSAS रायफल, SLR, .303 बंदूक सहित कई हथियार सौंपे.
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी को लगा तगड़ा झटका
माओवादियों के सरेंडर करने के दौरान बस्तर आईजी सुंदरराज पी और नारायणपुर एसपी रॉबिनसन गुड़िया मौजूद रहे. बस्तर आईजी और एसपी के सामने सरेंडर माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में जुड़कर आगे का जीवन बिताने का फैसला लिया. जिला प्रशासन की ओर से कहा गया कि सरेंडर माओवादियों के पुनर्वास को लेकर जो भी शासन की योजना है उसे मुहैया कराया जाएगा.
खात्मे की ओर बड़ा रहा माओवादी संगठन
हाल के वर्षों में बस्तर में कई बड़े नक्सली नेताओं और सदस्यों ने सरेंडर किया है. बड़े माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण और शीर्ष नेतृत्व के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद से संगठन में भगदड़ की स्थिति है.
31 मार्च 2026 नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ शासन ने 31 मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे की डेडलाइन रखी है. जिस तरह से माओवादी लगातार सरेंडर कर रहे हैं उससे तय समय सीमा के भीतर नक्सलवाद के खात्मे की उम्मीद पूरी होती नजर आ रही है.






