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बिहार में ‘डॉग बाबू’ विवाद के बाद असम में EC सख्त… वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर जारी किए ये निर्देश

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वोटर लिस्ट में अब ‘कुत्ते-बिल्ली’ नहीं दिखेंगे! असम में बीएलओ को मिला अनोखा टास्क, बिहार में बन गए थे ‘डॉग बाबू’ वोटर

वोटर लिस्ट में ‘नॉन-ह्यूमन’ फोटो का मसला भले मजाक जैसा लगे, लेकिन इससे सिस्टम की खामियां खुलकर सामने आईं. अब असम में बीएलओ के लिए यह बड़ा टास्क है कि वे हर घर जाएं, हर एंट्री को दोबारा चेक करें और सुनिश्चित करें कि इस बार लिस्ट में कोई कमी न रहे. 2026 में मतदाता सूची पूरी तरह नई, सटीक और ‘मानवीय’ होगी और कुत्ते-बिल्ली वाली गलतियां अब नहीं चलेंगी.
नई दिल्ली – बिहार में वोटर लिस्ट में ‘कुत्ते और बिल्ली’ की तस्वीरें घुस जाने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल क्या हुआ, चुनाव आयोग (EC) तुरंत एक्शन मोड में आ गया. भले ही यह मामला बिहार का था, लेकिन इसकी गूंज असम तक पहुंच गई. अब असम में बूथ-लेवल अफसर यानी बीएलओ को एक खास जिम्मेदारी दी गई है, वोटर लिस्ट की हर ऐसी एंट्री की जांच, जिसमें ‘नॉन-ह्यूमन’, ‘ब्लैक एंड व्हाइट’, ‘गलत साइज की फोटो’, या बिल्कुल ही ‘नो इमेज’ जैसी गड़बड़ियां हों. यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि 2026 की वोटर लिस्ट तैयार करने का काम शुरू हो चुका है और चुनाव आयोग इससे पहले कि कोई विवाद उठे, रिकॉर्ड को पूरी तरह दुरुस्त कर लेना चाहता है.
चुनाव आयोग ने असम के मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश भेजे हैं और साफ कहा है क‍ि सॉफ्टवेयर-आधारित रिपोर्ट निकालेंए जिनमें उन सभी एंट्री का विवरण हो जहां फोटो ब्लैक एंड व्हाइट है. फोटो तय मानक के अनुरूप नहीं है. फोटो किसी इंसान का नहीं है या फोटो है ही नहीं. इन एंट्री को सुधारने के लिए BLO फील्ड वेरिफिकेशन करें. सही फोटो के साथ फॉर्म-8 भरवाएं. हर बदलाव का एक पूरा रिकॉर्ड रखा जाए ताकि भविष्य में कोई सवाल न उठे. चुनाव आयोग ने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ने पर BLO खुद भी मतदाता की तस्वीर खींच सकते हैं, ताकि कोई एंट्री गलत न रहे.
डुप्लीकेट, गलत एड्रेस और ‘मल्टीपल एंट्री’-सब पर एक साथ एक्शन
EC ने ये भी स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट प्रकाशन (यानी प्री-फाइनल लिस्ट) से पहले सभी ‘लॉजिकल एरर’ एड्रेस की गड़बड़ियां और फोटो की गुणवत्ता सब कुछ ठीक कर दिया जाए. मतलब इस बार आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि वोटर लिस्ट में ‘नोटional हाउस नंबर’ देने से प्रॉपर्टी की कानूनी स्थिति पर असर पड़ेगा? यह सिर्फ एक तकनीकी तरीका है जिससे एक ही परिवार के वोटर एक ही पोलिंग स्टेशन में रहते हुए लाइनों में बिखरे न रहें. BLO को यह भी कहा गया है कि नोटional नंबर के साथ पास का कोई लैंडमार्क भी लिखें, ताकि घर को पहचानने में आसानी हो.
बिहार विवाद और उसका असर
यह पूरा मामला तब उठा जब सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि बिहार के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान कुछ लोगों ने सिस्टम की खामियां दिखाने के लिए कुत्तों और बिल्लियों की तस्वीरें वोटर लिस्ट में चढ़वा दीं. हालांकि ECI ने इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन विवाद इतना तूल पकड़ गया कि आयोग ने देशभर में डेटा-चेक प्रक्रिया और सख्त कर दी. असम इसका पहला बड़ा उदाहरण है.
असम में चल रहा है स्पेशल रिवीजन
असम में 17 नवंबर से ही मतदाता सूची का स्पेशल रिवीजन जारी है. ECI के मुताबिक 1 जनवरी 2026 को क्वालिफाइंग डेट माना जाएगा. 10 फरवरी 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी. इससे पहले तक आयोग का फोकस होगा. हर फोटो सही हो, हर मतदाता की पहचान साफ हो, और किसी भी तरह की फर्जी एंट्री को पूरी तरह हटाया जाए.
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
वोटर लिस्ट में जानवरों की तस्वीरें मिलने जैसे आरोप न सिर्फ शर्मनाक हैं बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधे सवाल खड़े करते हैं. असम में यह अभियान यह संकेत देता है कि चुनाव आयोग अब हर राज्य में डेटा-स्पष्टता, फोटो-गुणवत्ता और फर्जी एंट्री पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है.