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शव के लिए था इंजेक्शन बच्चे को लगाया, पिता करते रहे मना, नर्स पर नहीं पड़ा फर्क, पहले बेहोश फिर मौत

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने पिता की स्पष्ट मनाही के बावजूद बच्चे को ऐसा इंजेक्शन लगा दिया, जिसका इस्तेमाल मृत शरीर को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में किया जाता है. इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई.
भोपाल – मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लापरवाही की वजह से एम्स अस्पताल में तीन साल के मासूम की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि कैंसर पीड़ित 3 साल के सार्थक यादव की गलत इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई. पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और एफआईआर में नर्स मधुबाला शर्मा और अनुका गुजराती का नाम दर्ज है.

बताया जा रहा है कि बायोप्सी के सैंपल सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला रसायन फॉर्मेलिन एक सिरिंज में भरकर वार्ड में रखा गया था, लेकिन नर्स अनुका गुजराती ने इसे सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय मरीज सार्थक के बेड के पास रख दिया. यहीं उनसे बड़ी गलती हो गई, जबकि उन्हें इसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखना था.

बालक सार्थक की आईवी (IV) लाइन चोक होने पर ड्यूटी पर मौजूद अन्य नर्सिंग ऑफिसर मधुबाला ने आईवी कैनुला को फ्लश करने के लिए बिना लेबल और सामग्री की जांच किए, बेडसाइड लॉकर पर रखी फॉर्मेलिन से भरी सिरिंज उठा ली. इस दौरान बिस्तर के पास मौजूद बच्चे के पिता सिद्धार्थ यादव ने नर्सिंग ऑफिसर मधुबाला को तीन बार टोका और सचेत किया कि इसमें आईव्ही फ्लूड का फ्लेशर नहीं है, इसे डॉक्टर से बिना पूछे बच्चे को न लगाएं. इसके बावजूद नर्स मधुबाला ने परिजनों की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए घोर उतावलेपन और उपेक्षापूर्वक कार्य करते हुए फॉर्मेलिन बालक सार्थक को इंट्रावीनस (IV) रूट से इंजेक्ट (फ्लश) कर दिया, जो मौत का कारण बना.
फॉर्मेलिन एक खतरनाक रसायन होता है, जो मेडिकल संस्थानों में बायोप्सी सैंपल और शवों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होता है.
बुखार की शिकायत होने के बाद अस्पताल में करवाया गया था भर्ती
3 साल के मृतक सार्थक यादव के पिता सिद्धार्थ यादव सागर जिले की बीना तहसील के गांव कौरजा के रहने वाले थे. बच्चे को 15 दिसंबर 2025 में बुखार की शिकायत के कारण एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक वार्ड-2 में डॉ. भावना हींगरा के अंतर्गत भर्ती कराया गया था. मरीज का ‘बोन मेरो एस्पिरेशन और बायोप्सी’ परीक्षण होना तय था.
नर्सों के खिलाफ दर्ज किया गया मामला
इंजेक्शन लगने के बाद सार्थक बेहोश हो गया और PICU ले जाते वक्त सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर उसने दम तोड़ दिया. यह घटना दिसबंर 2025 की है. बाद में एम्स की कमेटी ने जांच रिपोर्ट में नर्सों को दोषी माना है. अब जून में दोनों आरोपी नर्सों के विरुद्ध अपराध क्रमांक BNS के 2026 तहत, धारा 106, 286 में अपराध दर्ज कर लिया गया है.