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गरियाबंद – स्कूल में बच्चे शिक्षक को और शिक्षक मतदाता को ढूंढ रहे

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शिक्षक बने बीएलओ, हाथों में किताबो की जगह वोटर लिस्ट,हेड मास्टर करेंगे अब कुत्तों मवेशियो की निगरानी

शेख हसन खान गरियाबंद– कुछ दिनों बाद ही स्कूलों में छमाही परीक्षा शुरू होने वाली है लेकिन कई स्कूलों में पढ़ाई ठप है बच्चे स्कूलों में टीचर को ढूंढ रहे हैं और एसआईआर कार्य के तहत टीचर मतदाताओं को ढूंढ रहे हैं इधर मतदाता सूची में अपना नाम पुख्ता करने मतदाता वर्ष 2003 की सूची में अपने पिता और माता का नाम ढूंढ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जो बचे है उन्हें धान खरीदी में लगा दिया गया है इस बीच नया आदेश आ गया है कि हेड को मास्टर स्कूल में प्रवेश करने वाले कुत्तों की गणना और निगरानी करेंगे इन सब के मध्य बच्चों का भविष्य अधर में नजर आ रहा है। बताते चलें कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम सरकारी कर्मचारी कर रहे हैं इस कार्य में प्राइमरी और मिडिल स्कूल के सैकड़ो शिक्षकों को तैनात कर दिया गया है लगातार अधिकारियों के दबाव के चलते शिक्षक एसआईआर कार्य में दिन रात जुटे हुए हैं, वही फील्ड में नेटवर्क से भी परेशान हैं उन्हें घर आकर देर रात तक यह कम निपटना पड़ रहा है इस कारण शिक्षक स्कूलों के बजाय मतदाताओं के घरों में नजर आ रहे हैं शिक्षक को इस कार्य में लगाया गया है इसके चलते स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही है बताया गया कि नवंबर महीने के अंत में छमाही परीक्षा शुरू होने वाली है ऐसे में विद्यार्थी और पालक दोनों परेशान हैं, कि बिना पढ़ाई बच्चे परीक्षा कैसे दिलाएंगे? वे यह प्रश्न भी उठा रहे हैं कि परीक्षा लेने के लिए भी शिक्षकों को समय दिया जाएगा कि नहीं? इधर परिस्थिति वश अध्ययन कराने वाले शिक्षक एसआईआर प्रपत्र भरवाने के लिए मतदाताओं को ढूंढ रहे हैं, वह दूसरी तरफ मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने पुराने मतदाता सूची में अपने माता-पिता का नाम ढूंढ रहे हैं इधर पुरानी मतदाता सूची नहीं मिलने के कारण ग्रामीण परेशान है और उन्हें कंप्यूटर दुकानों में जाकर राशि खर्च कर कापी प्राप्त करनी पड़ रही है।

ज्ञात को कि गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र में अधिकांश प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल एक दो शिक्षक के भरोसे चल रहे है इस कार्य में शिक्षको को बीएलओ के रूप में डियूटी लगाई गई है कहीं कही एक शिक्षक पांच कक्षाओं को तो कही कही एक शिक्षक मिडिल स्कूल के तीन कक्षाओं को कैसा संचालित कर रहे होगें यह सोचने का विषय है उपर से शिक्षको को अन्य कार्य भी दे दिया गया है जिसके कारण पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है बच्चे सुबह स्कूल तो जाते है लेकिन खेल कुद कर मध्यान भोजन कर 12 बजे ही लौट जा रहे है। एसे में ग्रामीण क्षेत्र में पुरी तरह पढ़ाई प्राभावित है मतदाता सूची में डियूटी लगाने के कारण स्कूलों में तिमाही-छमाही और आने वाले वार्षिक परीक्षा में इसका असर देखने को मिलेगा। इसका खमियाजा छात्र छात्राओ को उठाना पड़ेगा। शिक्षक बने बीएलओ हाथो में किताबो के जगह वोटर लिस्ट लेकर घर-घर दस्तक दे रहे है और इस कार्य में भारी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है एक एक मतदाता के पार तीन-तीन चार-चार बार जाना पड़ रहा है। बीएलओ परेशान हो गए है लेकिन अपनी परेशानी किसको बताए।

बीएलओ ने बताई परेशानी

देश भर में प्रक्रिया एक साथ चलने से बीएलओ एप की सर्वर समस्या बढ़ रही है जिसे फार्म अपलोट और डिजाईनेशन में देरी हो रही है एसआईआर नियम के अनुसार जिन लोगो का नाम 2003 के मतदाता सूची में नही है उन्हे अपने माता पिता का जानकारी देना अनिवार्य है इससे दूसरे जिले या राज्य से आई बहुओं को अपने मयके से 2003 की मतदाता सूची माता पिता का वोटर आई डी आधार कार्ड मंगाने की मजबूरी है बीएलओ बताते है कई परिवार का नाम 2003 की सूची में नही मिलता जिससे गणना पत्र भरना मुश्किल हो रही है ग्रामीण क्षेत्रो में किसान कृषि कार्य में व्यस्त होने से घरो पर लोग नही मिल रहे है बार-बार जाना पड़ रहा है।

हेड मास्टर करेंगे अब कुत्तों मवेशियो की निगरानी

इधर स्कूल की व्यवस्था के लिए हेड मास्टर को नया आदेश थमाया गया है इस आदेश में कहा गया है कि स्कूल में कोई कुत्ता प्रवेश न करें अगर कुत्ता प्रवेश करता है, तो वह नर है कि मादा देसी है कि दूसरी नस्ल का। उसका कौन सा रंग है। वह कितने बजे स्कूल में प्रवेश किया? इसका प्रोफार्मा भेजा गया है विद्यालय के संस्था प्रमुख को नोडल नियुक्त किया जायेगा जो शाला परिसर के आसपास विचरण कर रहे आवारा कुत्तो की सूचना ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत निगम के डाक क्रैचर नोडल अधिकारी को देंगे। शाला प्रमुख ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत निगम के सहयोग से शाला में आवारा कुत्तो की प्रवेश की रोकथाम हेतु आवश्यक प्रबंध करेगें साथ ही आवारा कुत्तो के काटने पर प्रभावित बच्चे को त्वरित रूप से उपचार हेतु निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में पहुंचाया जाना सूनिश्चित करेगें वहीं आवारा मवेशियों के रोकथाम में भी संस्था प्रमुख अपना योगदान देगें। इस संदर्भ ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक अपने मूल कार्य पढ़ाई को छोड़कर बाकी कार्य में लगे हुए हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य का क्या होगा? इस दिशा में न जनप्रतिनिधि सोच रहे हैं और नहीं सत्ता पर बैठे मंत्री। चुटकी लेते ग्रामीणों का यह भी कहना है कि क्या एसआईआर के चलते सरकार तिमाही परीक्षा में भी जनरल प्रमोशन देगी।

आदेश से बढ़ेगा काम का दबाव

शिक्षको ने कहा की प्रदेश में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता वर्ष मनाया जा रहा है वहीं, लोक शिक्षण संचालनालय आवारा कुत्तों की जानकारी देने की ड्यूटी लगा रहा है यह आदेश बताता है कि उच्चाधिकारी सरकार को सही तरीके से ब्रीफ नहीं कर रहे हैं शिक्षक भारी मानसिक दबाव में कार्य कर रहे हैं उन पर 34 से अधिक सरकारी ऐप का बोझ है एसआईआर का दबाव है सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तामीली पंचायत विभाग या दूसरे स्थानीय अमले के माध्यम से भी कराई जा सकती है।