गरियाबंद पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील कहा, “हम आपके साथ हैं, बस हिंसा छोड़िए,छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक और ऐतिहासिक दिन जुड़ गया
गरियाबंद – जहां एक ओर बस्तर में रूपेश दादा उर्फ सतीश दादा के नेतृत्व में 210 माओवादी कैडरों ने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद उदंती एरिया कमेटी ने भी सशस्त्र संघर्ष को विराम देने का संकेत दिया है। इसी बीच गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने एक वीडियो जारी करते हुए नक्सलियों से भावनात्मक अपील की है। उन्होंने कहा हम आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। समाज की मुख्यधारा में लौट आइए, हथियार छोड़िए, हिंसा को विराम दीजिए। जो भी नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहता है, वह बेझिझक सीधे मुझसे संपर्क करे मैं और मेरी टीम उसकी और उसके परिवार की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेंगे। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने इसके साथ ही अपना सीधा संपर्क नंबर 94791 90067 सार्वजनिक करते हुए कहा कि जो भी माओवादी हिंसा छोड़ना चाहता है, वह इस नंबर पर किसी भी समय संपर्क कर सकता है। उन्होंने कहा कि अब वक्त है
बंदूक की जगह किताब उठाने का, समाज को जोड़ने का।
संघर्ष से संवाद की ओर
16 अक्टूबर को महाराष्ट्र में सोनू दादा और 61 नक्सल कार्यकर्ताओं ने सशस्त्र आंदोलन को विराम दिया था, वहीं 17 अक्टूबर को बस्तर में 210 माओवादी कैडरों ने सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर “पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन” की दिशा में कदम बढ़ाया। इसके बाद उदंती एरिया कमेटी ने भी अपने संदेश में कहा कि अब जनता के बीच रहकर जनांदोलन और संवैधानिक माध्यमों से समस्याओं को हल किया जाना चाहिए।






