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पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने के बावजूद निगम के पास मौजूद नहीं डेटा

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रायपुर – राजधानी में पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने के बावजूद नगर निगम के पास इसका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। नियमों के अनुसार, कुत्ता पालने की जानकारी निगम को देना आवश्यक है

लेकिन न तो कुत्ता पालने वाले मालिक यह जानकारी दे रहे हैं और न ही निगम प्रशासन इस पर कड़ाई कर रहा है। मेकाहारा अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20 डाग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें अधिकांश पालतू कुत्तों के काटने के शिकार होते हैं।

 पिटबुल कुत्ता नहीं रखने का निर्देश दिया

इस संबंध में नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी ने शनिवार को बताया कि मामला सामने आने पर नगर निगम की टीम शुक्रवार शाम उक्त कुत्ते के मालिक के साथ-साथ महिला के घर भी गई।सिंह ने बताया कि महिला ने कोई शिकायत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद कुत्ते को तुरंत नगर निगम सीमा क्षेत्र से बाहर किसी फार्म हाउस आदि में भेजने का उसके मालिक को निर्देश दिया गया।पालतू कुत्तों के काटे जाने पर रेबीज के कारण लोगों की मौत होने को ध्यान में रखते हुए राज्यों को पिटबुल टेरियर, अमेरिकन बुलडॉग, रोटवीलर और मास्टिफ सहित 23 प्रजातियों के खूंखार कुत्तों की बिक्री और प्रजनन पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था।

नसबंदी और टीकाकरण अभियान

नगर निगम के मुताबिक, शहर में प्रतिदिन 400 से 450 आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज रोधी टीकाकरण किया जाता है। नसबंदी के बाद कुत्तों को तीन दिन तक डाग शेल्टर में रखकर उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इस कार्यक्रम पर निगम हर साल लगभग 15 लाख रुपये खर्च करता है।

बिजनेस हब और रिहायशी इलाकों में खतरा

रिहायशी इलाकों, बाजारों और स्कूल-कालेज के आसपास डाग बाइट के मामले आम हो चुके हैं। इसके बावजूद एफआइआर दर्ज होना दुर्लभ है। हाल के वर्षों में केवल एक मामला अनुपम नगर के पिटबुल हमले पर कार्रवाई हुई। 13 जुलाई 2024 को डिलीवरी बाय पर दो पिटबुल ने हमला किया था, जिसके बाद मालिक अक्षय राव को धारा 291 बीएनएस के तहत गिरफ्तार किया गया था।