बता दें कि 2003 के चुनाव में भाजपा की जीत के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जोगी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगा। वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय की शिकायत पर अदालत ने सीबीआई को 5 बिन्दुओं पर जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12, सहपठित धारा 120 बी 34 के तहत चारों पर एफआईआर दर्ज की थी।
इसके बाद 2006 में सीबीआई ने कानूनी सलाह ली, जिसमें कहा गया कि जोगी कार्यवाहक मुख्यमंत्री थे, इसलिए एफआईआर नहीं हो सकती। 2013 में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट पेश की तो पांडे ने का कहना था कि जब सीबीआई ने स्वीकार किया है, पत्र की लिखावट जोगी की है, पैसे जोगी के थे और टेप में उनकी आवाज है, तो और क्या सबूत खोज रही है। कोर्ट ने इस पर सीबीआई से जवाब मांगा था।
सीबीआई ने पिछले साल जवाब कोर्ट में पेश किया। जोगी पर आरोप था कि भाजपा के 8 विधायकों को खरीदने की कोशिश की थी। उन्हें 45 लाख रुपए नकद और बस्तर के तत्कालीन सांसद बलीराम कश्यप को मुख्यमंत्री पद देने की बात कही गई थी।






