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दुर्ग रेलवे स्टेशन धर्मांतरण प्रकरण में आया नया मोड़, युवती ने बजरंग दल और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 25 जुलाई को घटित मामले में नया अपडेट सामने आया है. पीड़ित युवती ने बजरंग दल और पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. आइए आपको पूरे मामले के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.

दुर्ग – 25 जुलाई को घटित दुर्ग रेलवे स्टेशन पर कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में अब नया मोड़ सामने आया है. इस मामले में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले की रहने वाली छुड़ाई गई एक युवती ने आज, गुरुवार को दोपहर 1 बजे खुलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखी है. उसने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. युवती ने दावा किया है कि वह अपनी मर्जी से काम के लिए जा रही थी और युवक को झूठे आरोप में फंसाया जा रहा है. इसके साथ ही, उसने बजरंग दल और पुलिस पर मारपीट और झूठा बयान दिलवाने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं.

क्या है दुर्ग रेलवे स्टेशन धर्मांतरण मामला?

छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हाल ही में कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी के शक में दो नन, एक युवक और तीन युवतियों को हिरासत में लिया गया था. बाद में युवतियों को नारायणपुर उनके घर भेज दिया गया था. लेकिन, अब इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ सामने आया है. नारायणपुर के कूकड़ा झोर की रहने वाली छुड़ाई गई एक युवती ने खुलकर मीडिया के सामने बयान दिया है.

युवती ने लगाए आरोप

युवती ने बताया कि वह और उसकी दो अन्य साथी ओरछा निवासी युवतियां अपनी मर्जी से उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित मिशनरी अस्पताल में नौकरी के लिए जा रही थीं. उन्हें स्टेशन तक नारायणपुर का ही एक युवक सुखराम छोड़ने आया था. वहीं से उन्हें दो मिशनरी नन के साथ सफर करना था. लेकिन, दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें जबरन रोका और कथित रूप से मारपीट करते हुए पुलिस की मौजूदगी में झूठा बयान लिखवाया.

युवती ने यह भी आरोप लगाया कि वन स्टॉप सखी सेंटर ने उसे बहला कर गांव वापस भेज दिया और बजरंग दल दुर्ग द्वारा परिवार को धमकियां भी दी गईं. युवती ने साफ कहा है कि वह वर्षों पहले अपने परिवार के साथ स्वेच्छा से ईसाई धर्म अपना चुकी है और मिशनरी सेवा करना चाहती है. नन और युवक को उसने पूरी तरह निर्दोष बताया है और इस मामले को एक साजिश बताया है.