
छत्तीसगढ़ के 2014 बैच के आईएफएस अधिकारी पंकज सिंह राजपूत और पत्नी अदिति सिंह के बीच पारिवारिक विवाद सार्वजनिक हुआ। अदिति ने प्रताड़ना के आरोप लगाए, जबकि अधिकारी ने दावों को गलत बताया
रायपुर – छत्तीसगढ़ कैडर के 2014 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी पंकज सिंह राजपूत और उनकी पत्नी अदिति सिंह के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। अदिति सिंह ने एक वीडियो जारी कर अपने पति, सास, ससुर और ननद पर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। वहीं, पंकज सिंह राजपूत ने इन आरोपों को गलत बताते हुए इसे पारिवारिक और लंबे समय से अदालत में चल रहा मामला बताया है।
पत्नी ने वीडियो जारी कर बताई अपनी बात
अदिति सिंह का आरोप है कि उनके पति उनके साथ अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके नाबालिग बेटे के साथ भी अनुचित व्यवहार किया जाता है। अदिति ने अपने वीडियो में ससुराल पक्ष पर सामाजिक और आर्थिक रूप से परेशान करने के आरोप भी लगाए हैं।
अदिति के मुताबिक, वर्ष 2020 में अदालत से नोटिस मिलने के बाद उनके बेटे के भरण-पोषण के लिए हर महीने 8 हजार रुपये दिए जाने लगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक अदालत ने पंकज राजपूत की ओर से उनकी मां निर्मला देवी के खिलाफ दायर मामले को खारिज कर दिया है।
अधिकारी ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर, पंकज सिंह राजपूत ने मीडिया से बातचीत में पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि दोनों के बीच पारिवारिक विवाद पिछले करीब पांच वर्षों से अदालत में विचाराधीन है। ऐसे मामले को सार्वजनिक मंच पर उठाना उचित नहीं है। पंकज राजपूत ने कहा कि वह बच्चे के अभिभावक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने विवाद को निजी और न्यायालय से जुड़ा मामला बताते हुए सार्वजनिक आरोपों पर अपनी बात रखी।
महासमुंद में स्टाफ से व्यवहार को लेकर भी शिकायतें
पंकज सिंह राजपूत के कार्यकाल के दौरान स्टाफ के साथ उनके व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। जानकारी के मुताबिक, महासमुंद में उनकी पोस्टिंग के दौरान स्टाफ की ओर से उन्हें हटाने की मांग को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखे जाने का दावा किया गया था। हालांकि, इन शिकायतों के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल, पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रताड़ना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं होती है।