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छत्तीसगढ़ – पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय – 3 साल बाद भी PRSU में 111 पदों की भर्ती अधूरी, PhD छात्रों को गाइड की कमी

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रायपुर – राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (पीआरएसयू) में तीन साल बीत जाने के बाद भी 111 प्राध्यापक पदों की भर्ती प्रक्रिया अधूरी पड़ी है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक केवल 52 पदों पर ही नियुक्तियां कर सका है, जबकि 59 पद अब भी खाली हैं। नियमित प्राध्यापकों की इस भारी कमी के कारण विश्वविद्यालय में पठन-पाठन और शोध कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इससे अध्ययनरत विद्यार्थियों और शोधार्थियों को निरंतर कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है।

दो चरणों में अटकी नियुक्ति प्रक्रिया
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राध्यापकों की इस भर्ती प्रक्रिया को दो अलग-अलग चरणों में विभाजित किया था। प्रथम चरण के अंतर्गत 60 पदों के लिए प्रक्रिया आरंभ की गई थी, जिनमें से अब तक केवल 40 पदों पर ही नियुक्तियां हो सकी हैं। दूसरे चरण में 51 पदों को शामिल किया गया था, लेकिन इस चरण में विश्वविद्यालय मात्र 12 पदों पर ही भर्ती कर पाया है। दोनों चरणों को मिलाकर कुल 111 पदों में से 52 पद भरे जा चुके हैं और 59 पद आज भी रिक्त पड़े हैं।
शोधार्थियों और उम्मीदवारों की चिंताएं
नियमित शिक्षकों के पद रिक्त रहने से सबसे अधिक असर पीएचडी शोधार्थियों पर पड़ रहा है। विश्वविद्यालय में गाइड की उपलब्धता न होने के कारण शोध कार्य गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। इस बीच, भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब विश्वविद्यालय ने भर्ती का विज्ञापन एक साथ जारी किया था, तो नियुक्तियां अलग-अलग चरणों में क्यों की जा रही हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, इस तरह अलग-अलग समय पर नियुक्ति होने से पहले चयनित और बाद में चयनित उम्मीदवारों के बीच वरिष्ठता को लेकर भी स्थिति बन सकती है।
विभिन्न विषयों के पद और राजनीतिक आरोप
विश्वविद्यालय में विज्ञापित 111 पदों में 18 प्रोफेसर, 37 एसोसिएट प्रोफेसर और 51 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद शामिल हैं। विभिन्न विषयों में समाजशास्त्र, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति और पुरातत्व, कंप्यूटर साइंस, साहित्य एवं भाषा, अर्थशास्त्र, फिजिक्स एंड एस्ट्रोफिजिक्स, फिलॉसफी एंड योगा, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड फोटोनिक्स, बायोसाइंस, एमबीए, फार्मेसी, एंथ्रोपोलॉजी, लॉ, रीजनल स्टडीज, जियोलॉजी, हिंदी, लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन, केमिस्ट्री, साइकोलॉजी और एनवायरनमेंटल साइंस शामिल हैं। इस मामले में कांग्रेस ने भी विश्वविद्यालय प्रबंधन पर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि चयन प्रक्रिया से पहले कुलपति के बार-बार अवकाश पर जाने के कारण कई बार भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई।